प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत अब शिपबिल्डिंग सेक्टर में एक नए विजन के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने यह बात पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भारतीय नौसेना के तीन स्वदेशी प्लेटफॉर्म—आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय—को राष्ट्र को समर्पित करने के बाद कही।
नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित ये तीनों पोत युद्ध संचालन, हाइड्रोग्राफिक सर्वे और पनडुब्बी रोधी अभियानों को मजबूत करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने बीते वर्षों में कई अहम नीतिगत सुधार किए हैं। घरेलू निर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि शिपबिल्डिंग, शिप रिपेयर और मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ऑपरेशंस (MRO) को एक बड़े राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन युद्धपोतों का राष्ट्र को समर्पण भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में समुद्री क्षेत्र में लाखों नए रोजगार सृजित होने की संभावना है और सरकार इस क्षेत्र को विकसित भारत के जॉब इंजन के रूप में देख रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में रक्षा उत्पादन तेजी से बढ़ा है और रक्षा निर्यात में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 तक भारत का रक्षा निर्यात करीब 700 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
आईएनएस दुनागिरी प्रोजेक्ट 17A का स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो ब्रह्मोस मिसाइल और मीडियम रेंज एयर डिफेंस सिस्टम से लैस है। आईएनएस संशोधक एक सर्वे पोत है, जिसे तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। वहीं आईएनएस अग्रय एक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्राफ्ट है, जो टॉरपीडो, रॉकेट लॉन्चर और सोनार सिस्टम से लैस है।
भारतीय नौसेना के अनुसार, इन पोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और इनके निर्माण में 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी रही है। यह भारत के घरेलू शिपबिल्डिंग उद्योग की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक की ट्राई-कमीशनिंग भारत की समुद्री क्षमता विकास के लिए ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि ये अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म देश के मजबूत रक्षा विनिर्माण तंत्र और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रमाण हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि ये युद्धपोत अब भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
