जकार्ता में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जहां उन्होंने वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत आर्थिक रफ्तार पर जोर दिया।
जकार्ता में मंगलवार को भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर जारी लगातार चुनौतियों और भू-राजनीतिक अस्थिरताओं के बावजूद भारत की आर्थिक प्रगति पूरी तरह से निर्बाध गति से आगे बढ़ रही है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की विशेष उपस्थिति वाले इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि देश में हो रहे निरंतर और व्यवस्थित आंतरिक सुधारों का एकमात्र उद्देश्य 1.4 अरब नागरिकों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को एक नई उड़ान देना है।
भारत के मौजूदा सामाजिक-आर्थिक विकास का सबसे मजबूत स्तंभ ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ का निरंतर चलने वाला मंत्र है। तात्कालिक या अस्थाई नीतियों के बजाय इस दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलाव ने देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंदी के बीच भी स्थिरता प्रदान की है। इस नीतिगत दृष्टिकोण का सबसे बड़ा असर भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जिसने आम नागरिकों और स्थानीय उद्यमियों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को तेजी से बढ़ाया है।
इसके अतिरिक्त, इस द्विपक्षीय बातचीत से भारत, इंडोनेशिया और संपूर्ण आसियान (ASEAN) क्षेत्र के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रवासी भारतीयों को एक मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक सेतु के रूप में प्रस्तुत करके, दोनों देश इस महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे में व्यापार, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को नई ऊंचाई देने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं। इस कार्यक्रम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की मौजूदगी दोनों देशों के गहरे होते कूटनीतिक और व्यापारिक तालमेल का एक स्पष्ट संकेत है।
वैश्विक संकटों के समय में भी भारत की वित्तीय मजबूती इस बात का प्रमाण है कि देश ने हाल के वर्षों में कई बड़े झटकों का सफलतापूर्वक सामना किया है। कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया के मौजूदा भू-राजनीतिक संकटों ने जहां दुनिया भर की सप्लाई-चेन को तोड़ दिया और कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को मंदी की ओर धकेल दिया, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास दर को बनाए रखा। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती और सबसे लचीली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है।
यह आधुनिक आर्थिक साझेदारी दो हजार साल से भी पुराने गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों पर टिकी है। महानदी (ओडिशा) में केले के तने से बनी नावें तैराने की ऐतिहासिक परंपरा और इंडोनेशिया में ‘वायांग कुलित’ के माध्यम से महाभारत का जीवंत मंचन तथा देवी श्री की पूजा, दोनों देशों के प्राचीन और समृद्ध सभ्यतागत जुड़ाव को दर्शाते हैं। यही साझा विरासत वर्तमान समय में दोनों लोकतांत्रिक देशों को एक मजबूत और सुरक्षित आर्थिक ढांचा तैयार करने में मदद कर रही है, जो भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट से इस पूरे क्षेत्र को सुरक्षित रख सके।
