लोकसभा में आज चुनाव सुधारों पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें विभिन्न दलों के सांसदों ने अपने-अपने विचार रखे। चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की। उन्होंने विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछा। उनका कहना था कि देश के कई राज्यों में SIR चल रहा है, लेकिन इसके लिए कोई कानूनी आधार मौजूद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय संविधान में SIR का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है और यह केवल चुनाव आयोग द्वारा दी गई एक सुविधा है।
मनीष तिवारी ने सुझाव दिया कि या तो VVPAT की पूरी गिनती हो या फिर देश को पेपर बैलेट प्रणाली पर लौट जाना चाहिए। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि चुनाव आयुक्तों के चयन की समिति में राज्यसभा में नेता विपक्ष एवं भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाना चाहिए।
इसके बाद बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे SIR का मुद्दा उठाकर बिहार चुनाव में मिली अपनी बड़ी हार से लोगों का ध्यान भटकाना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि वोट चोरी का पहला उदाहरण 1947 में देखने को मिला, जब पूरे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सहमति होने के बावजूद सरदार पटेल को प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया। उन्होंने 1975 की इमर्जेंसी और 1987 के कश्मीर चुनाव को भी ‘वोट चोरी’ के उदाहरण बताए।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव सुधार तभी सफल होंगे जब चुनाव आयोग बिल्कुल निष्पक्ष होगा। उन्होंने दोबारा बैलेट पेपर पर लौटने का सुझाव दिया और कहा कि जब जर्मनी और अमेरिका जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश पेपर बैलेट से मतदान करते हैं, तो भारत में EVM पर निर्भरता क्यों है।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR की वजह से देश के कई हिस्सों में BLOs पर अत्यधिक कार्य-भार बढ़ गया है, जिससे कई कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है।
जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने चुनाव आयोग का समर्थन करते हुए कहा कि वह SIR सही तरीके से कर रहा है और भारत में चुनाव हमेशा निष्पक्ष तरीके से संपन्न होते हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है तो EVM सही होती है, और जब हारता है तो EVM पर सवाल उठाए जाते हैं।
शिवसेना (UBT) के सांसद अनिल देसाई ने कहा कि दल-बदल कानून अब निष्प्रभावी हो गया है और EVM की जगह बैलेट पेपर को अपनाया जाना चाहिए।
एनसीपी (SCP) नेता सुप्रिया सूले ने चुनावों के दौरान होने वाली हिंसा और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।
आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने बिहार चुनावों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि VVPAT की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
चर्चा के दौरान EVM, VVPAT, SIR और चुनाव आयोग की भूमिका जैसे मुद्दों पर विभिन्न दलों ने कड़े और अलग-अलग विचार रखे, जिससे यह बहस संसद के सत्र की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में से एक रही।
