किर्गिज़ गणराज्य की राजधानी बिश्केक में आयोजित छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स (World Nomad Games) के उद्घाटन समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के अन्य नेताओं ने भाग लिया। यह प्रतिष्ठित आयोजन दुनिया भर की खानाबदोश सभ्यताओं की समृद्ध खेल परंपराओं, विविध संस्कृति और साझा विरासत का एक जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दी जानकारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अन्य SCO नेताओं के साथ बिश्केक में छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के आधिकारिक उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित होने वाला यह भव्य आयोजन विभिन्न देशों को उनकी साझा सांस्कृतिक धरोहर के उत्सव में एक साथ लाता है। बिश्केक एरिना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय दल का हाथ हिलाकर विशेष अभिवादन किया। इस 87 सदस्यीय भारतीय दल में 73 एथलीट, 10 सांस्कृतिक प्रतिनिधि और वैज्ञानिक कार्यक्रम के 4 प्रतिभागी शामिल हैं।
पारंपरिक खेलों और संस्कृति का अनोखा संगम
यह आयोजन 31 अगस्त से 6 सितंबर तक किर्गिस्तान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें दुनिया भर के एथलीट और प्रतिभागी पारंपरिक खेलों और खानाबदोश संस्कृति का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके मुख्य कार्यक्रम चोलपोन-अता, किरचिन और इस्सिक-कुल क्षेत्र के आसपास आयोजित किए जा रहे हैं।
वर्ल्ड नोमैड गेम्स का इतिहास
वर्ल्ड नोमैड गेम्स की नींव 2012 में तुर्किक देशों के प्रमुखों के शिखर सम्मेलन में रखी गई थी, जब किर्गिस्तान, अजरबैजान, कजाकिस्तान और तुर्की ने ‘बिश्केक घोषणा’ पर हस्ताक्षर किए थे। इसका पहला संस्करण 2014 में किर्गिस्तान में आयोजित हुआ था। इसके बाद 2016 और 2018 में भी किर्गिस्तान, 2022 में तुर्की (इजनिक) तथा 2024 में कजाकिस्तान (अस्ताना) ने इसकी सफल मेजबानी की थी।
इस वर्ष 43 खेलों की होगी स्पर्धाएं
इस वर्ष के संस्करण में कुल 43 पारंपरिक खेल शामिल किए गए हैं। इनमें गोरेश, कुराश और मंगोल बोख जैसी पारंपरिक कुश्ती शैलियां, कोक बोरू, केकपार, घुड़सवारी प्रतियोगिताएं, तोगुज कारगूल, मंगला, ओवारे, चुको, ओर्डो, रस्साकशी और स्ट्रॉन्गमैन इवेंट प्रमुख आकर्षण हैं। यह आयोजन खेल स्पर्धाओं के साथ-साथ क्षेत्रीय देशों के बीच सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने का प्रमुख मंच बना हुआ है।
