भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र आने वाले वर्षों में एक नई छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के चेयरमैन पवन के गोयनका ने कहा कि भारत ने वर्ष 2030 तक हर साल 50 अंतरिक्ष प्रक्षेपण (लॉन्च) करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और इसरो की तकनीकी क्षमता के समन्वय से भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है।
निजी भागीदारी के 5 वर्ष: 450 से अधिक स्टार्टअप्स
पवन गोयनका ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ (X) पर बताया कि पांच वर्ष पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के ऐतिहासिक निर्णय के अब सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं:
- स्टार्टअप्स में उछाल: 2014 में जहां देश में सिर्फ 1 स्पेस स्टार्टअप था, वहीं अगस्त 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 450 से अधिक हो चुकी है।
- व्यावसायिक क्षमता: स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सल और दिगांतारा जैसी निजी कंपनियां अब केवल प्रोटोटाइप तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यावसायिक स्तर पर रॉकेट लॉन्च और उपग्रह निर्माण कर रही हैं।
- निवेश में भारी वृद्धि: स्पेस क्षेत्र में निजी निवेश 2021-22 के $100.5 मिलियन से बढ़कर मार्च 2026 तक $618.5 मिलियन तक पहुंच गया है।
$45 अरब डॉलर तक पहुंचेगी भारत की स्पेस इकोनॉमी
वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग 9 अरब डॉलर की है, जिसके अगले एक दशक में बढ़कर 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
पवन गोयनका के अनुसार, इसरो का मुख्य फोकस नई और उन्नत तकनीकों के अनुसंधान पर रहेगा, जबकि निजी क्षेत्र विनिर्माण क्षमता बढ़ाकर अधिक रॉकेट और उपग्रहों के निर्माण का काम संभालेगा। उन्होंने नया मंत्र दिया: “भारत में निर्माण करो, भारत से लॉन्च करो और भारत से पूरी दुनिया को सेवाएं प्रदान करो।”
EOS-05 के सफल प्रक्षेपण का भी जिक्र
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में इसरो ने GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया है। 2,367 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट GSLV द्वारा भेजा गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है, जो आपदा प्रबंधन, कृषि और रणनीतिक निगरानी में मदद करेगा।
