प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सेवा जीवन का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए और यह हर व्यक्ति के स्वभाव में समाहित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में भी सेवा ही मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत बना रहना चाहिए, भले ही कोई सर्वोच्च पद पर ही क्यों न पहुंच जाए। प्रधानमंत्री मोदी ने वडनगर से वाराणसी की यात्रा कर रहे सेवा यात्रियों के साथ वर्चुअल बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि ‘सेवा परमो धर्म:’ का भाव ही हमारा मूल मंत्र होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति है। उन्होंने कहा कि चाहे पीएम-किसान योजना हो या पीएम सूर्य घर योजना, ऐसी तमाम योजनाएं आज अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने (लास्ट-माइल डिलीवरी) के लिए जानी जाती हैं। जब सेवा की भावना होती है, तभी देश के चार करोड़ गरीबों को पक्के मकान मिल पाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब सेवा का भाव राष्ट्र की नीतियों में जुड़ जाता है, तो सेवा खुद देश की प्रगति का सबसे बड़ा इंजन बन जाती है। इसी भावना से ऐसी अभिनव योजनाएं जन्म लेती हैं जिन्होंने 25 करोड़ नागरिकों को गरीबी के चक्र से बाहर निकाला है।
पीएम मोदी ने कहा कि राजनीति, चुनाव और शासन की व्यवस्थाएं अपनी जगह हैं, लेकिन हम राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित लोग हैं और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को सभी को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। आज की युवा पीढ़ी विकसित भारत की शिल्पकार भी है और आगे चलकर इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी भी वही बनेगी।
बातचीत के दौरान सेवा यात्रियों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान उन्होंने पौधारोपण किया और स्वच्छता अभियान चलाए। साथ ही, लोगों के साथ संवाद स्थापित कर विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभों पर उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया भी प्राप्त की।
