संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भारत द्वारा 1.86 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले ‘ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर Phase-III’ (GEC-III) को दी गई मंजूरी का स्वागत किया है। यूएन ने ग्रिड सुदृढ़ीकरण और बैटरी स्टोरेज से जुड़ी इस योजना को एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि इससे देश की जनता और अर्थव्यवस्था दोनों को व्यापक लाभ मिलेगा।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन (UN Climate Change) के कार्यकारी सचिव साइमन स्टीएल ने एक समाचार एजेंसी को दिए बयान में कहा कि यह पहल भारत को अपनी बढ़ती अक्षय ऊर्जा क्षमता का पूर्ण उपयोग करने, बिजली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में अपनी स्थिति को अधिक मजबूत करने में मदद करेगी।
उन्होंने कहा कि यह योजना भारत की बिजली प्रणाली में नवीकरणीय ऊर्जा को एकीकृत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास को गति देगी। स्टीएल ने भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संवृद्धि के दृष्टिकोण से बैटरी स्टोरेज के रणनीतिक महत्व पर विशेष जोर दिया।
यूएन अधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ते बदलाव के बीच मजबूत बिजली ग्रिड और बैटरी स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), निर्माण (कंस्ट्रक्शन) और ऊर्जा भंडारण क्षेत्रों में व्यापक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणालियों (intra-State transmission systems) को मजबूत करने और ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ (BESS) की तैनाती को बढ़ावा देने के लिए 1,86,405 करोड़ रुपये के कुल व्यय के साथ GEC-III को मंजूरी दी है, जिसमें 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है।
