नेपाल के पहाड़ी इलाकों में एक बार फिर कुदरत का भयानक रूप देखने को मिला है। अगस्त में आई तबाही का मंजर अभी लोग भूले भी नहीं थे कि 11 अक्टूबर 2026 की सुबह नेपाल के गोरखा जिले से एक और चिंताजनक खबर सामने आई। गोरखा जिले में बहने वाली बूढ़ी गंडकी नदी (Budhi Gandaki River) में भूस्खलन (Landslide) के बाद अचानक तेज पानी और मलबे का भारी सैलाब आ गया, जिससे निचले इलाकों में तबाही मच गई है।
भूस्खलन से बदला नदी का रास्ता, कई घर और पुल बहे
प्राप्त जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन के कारण नदी का स्वाभाविक बहाव अवरुद्ध (Block) हो गया था। नदी का रास्ता रुकने से पीछे भारी मात्रा में पानी जमा हो गया और जब यह प्राकृतिक अवरोध टूटा, तो पानी मलबे के साथ तेजी से नीचे की ओर बहा।
पानी के इस प्रचंड बहाव में:
- नदी किनारे बसे कई घर पानी में बह गए और क्षतिग्रस्त हो गए।
- दो प्रमुख सस्पेंशन (झूला) पुल पूरी तरह नष्ट हो गए।
- इलाके में स्थित बूढ़ी गंडकी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, घटना की सुबह तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन संपत्ति का बड़ा नुकसान हुआ है और स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
प्रशासन ने जारी की चेतावनी: ऊंचाई वाले इलाकों में जाने की अपील
हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के ‘राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण’ (NDRRMA) ने 11 अक्टूबर को ही तत्काल प्रभाव से बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी।
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि:
- वे नदी के आसपास जाने या जलस्तर देखने से बचें।
- त्रिशुली दोभान तक के निचले तटीय क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतें।
- तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।
पहाड़ी नदियों की बाढ़ में केवल पानी का स्तर नहीं बढ़ता, बल्कि उसके साथ बड़े-बड़े पत्थर, चट्टानें और मिट्टी का मलबा भी बेहद रफ्तार से आता है। ऐसे में तटों या पुलों पर जाकर वीडियो बनाना बेहद जानलेवा साबित हो सकता है।
अगस्त की भोटे कोशी बाढ़ की यादें हुई ताज़ा
यह ताजा आपदा 26 अगस्त 2026 को नेपाल की भोटे कोशी और त्रिशुली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ की याद दिलाती है। उस समय भी अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी, जिससे सड़क और पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गए थे।
क्या भारत (बिहार-यूपी) पर भी पड़ेगा असर?
नेपाल की नदियों में आने वाले उफान का सीधा असर भारत के मैदानी इलाकों पर भी पड़ता है। अगस्त की बाढ़ के बाद भी भारत के राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने गंडक नदी से सटे बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में निगरानी और तैयारियां बढ़ा दी थीं। बूढ़ी गंडकी में आई इस नई बाढ़ के बाद एक बार फिर भारत के तटीय और सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता बढ़ गई है।
