अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच तत्काल प्रभाव से एक ऊर्जा युद्धविराम (Energy Ceasefire) का अचानक ऐलान कर सभी को चौंका दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर जानकारी दी थी कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और उन्होंने दोनों पक्षों से इसका उल्लंघन न करने की अपील की है। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह सीजफायर कितने दिनों तक प्रभावी रहेगा और इसे लागू करने की शर्तें क्या होंगी। इस घोषणा के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
ट्रंप के इस ऐलान के तुरंत बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की प्रतिक्रिया सामने आई, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें इस समझौते की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और उनका देश अमेरिका से इसके बारे में पूरी डीटेल मिलने का इंतजार कर रहा है। जिन देशों के बीच यह संघर्षविराम घोषित किया गया है, उन्हें खुद इसकी भनक न होने से स्थिति असमंजस भरी बन गई है। हालांकि, जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए रूस को भी इसी तरह की प्रतिबद्धता दिखानी होगी। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले एक हफ्ते में रूस ने यूक्रेन के बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और तेल-गैस सुविधाओं पर 200 से ज्यादा हमले किए हैं, जिसमें 150 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 700 से ज्यादा घायल हुए हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश युद्ध खत्म करने और लोगों की जान बचाने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है और इसके लिए सेना को निर्देश भी दिए जा चुके हैं। अब कीव प्रशासन अमेरिका और रूस के बीच हुई बातचीत का स्पष्ट ब्यौरा मिलने का इंतजार कर रहा है। दूसरी ओर, रूस की तरफ से इस अचानक घोषित ऊर्जा सीजफायर पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घोषणा के बाद अब यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है कि क्या वास्तव में रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को लेकर जमीन पर राजी होते हैं या नहीं।
