गृह मंत्रालय (MHA) ने जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है। इस संबंध में मंत्रालय द्वारा आज एक गैजेट अधिसूचना जारी की गई। इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य जनगणना कार्य के लिए पात्र प्रगणकों (Enumerators) की सूची का विस्तार करना है, ताकि जनगणना प्रक्रिया को और अधिक सुचारू एवं व्यापक बनाया जा सके।
संशोधन के मुख्य बिंदु:
- शिक्षकों की व्यापक भूमिका: अब सरकारी और स्थानीय निकायों के स्कूलों के अलावा, सहायता प्राप्त (Aided) व गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) निजी शिक्षण संस्थानों तथा सोसाइटियों या ट्रस्टों द्वारा संचालित संस्थानों के शिक्षकों को भी जनगणना प्रगणक के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा।
- विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों का समावेश: केंद्र और राज्य सरकारों तथा स्थानीय प्राधिकरणों में कार्यरत लिपिकों (Clerks) एवं अन्य अधिकारियों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), वैधानिक निकायों, बैंकों, कंपनियों, संस्थानों, सोसाइटियों और ट्रस्टों के कर्मचारियों को भी इस कार्य में शामिल किया गया है।
- राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का अधिकार: नए नियमों के तहत संबंधित राज्य सरकारों या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को यह अधिकार दिया गया है कि वे उपर्युक्त श्रेणी के अलावा अन्य किसी भी उपयुक्त व्यक्ति को जनगणना कार्य के लिए नियुक्त कर सकते हैं।
