अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों और बाजार के बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले जरूरी सेवाओं को बाधित कर सकते हैं तथा बाजार का भरोसा डगमगा सकते हैं। IMF ने साइबर खतरों को तेजी से उभरता हुआ ‘सिस्टमिक रिस्क’ (सिस्टमगत जोखिम) करार दिया है।
डिजिटलीकरण ने बढ़ाया जोखिम
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय सेवाओं के तेजी से होते डिजिटलीकरण और एक-दूसरे से परस्पर जुड़ने के कारण साइबर हमलों का असर पहले से कहीं अधिक गंभीर हो सकता है। बड़े बैंकों, भुगतान प्रणालियों या अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर एक सफल हमला तुरंत भारी नुकसान पहुंचा सकता है और पूरे वित्तीय सिस्टम में अविश्वास का माहौल पैदा कर सकता है।
AI की दोहरी भूमिका
IMF ने फ्रंटियर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मॉडल साइबर हमलों को और अधिक शक्तिशाली व सटीक बनाने के साथ-साथ बचाव की क्षमताओं को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। सरकारी समर्थन वाले समूहों, रैनसमवेयर गिरोहों और अंदरूनी लोगों के पास अब पहले से कहीं अधिक उन्नत तकनीक और उपकरण मौजूद हैं।
थर्ड-पार्टी निर्भरता और कमजोरियां
तेजी से बढ़ते डिजिटलीकरण ने वित्तीय संस्थानों के लिए खतरे का दायरा काफी बढ़ा दिया है। क्लाउड सेवाओं, बाहरी सेवा प्रदाताओं (थर्ड-पार्टी प्रदाताओं) और रियल-टाइम भुगतान प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण ‘कॉमन पॉइंट ऑफ फेलियर’ का जोखिम बढ़ गया है। कुछ चुनिंदा टेक्नोलॉजी प्रदाताओं पर भारी निर्भरता पूरे वित्तीय ढांचे को कमजोर बना सकती है।
IMF की सिफारिशें
IMF ने साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, साइबर घटनाओं की पारदर्शी और बेहतर रिपोर्टिंग, थर्ड-पार्टी जोखिमों की कड़ी निगरानी और परिचालन संबंधी लचीलापन (operational resilience) बढ़ाने का जोरदार आह्वान किया है। रिपोर्ट में चेताया गया है कि भले ही ये जोखिम अकेले वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा न दिखें, लेकिन मौजूदा आर्थिक कमजोरियों के साथ मिलकर ये गंभीर वित्तीय नुकसान पहुंचा सकते हैं। IMF ने साइबर जोखिमों को उन तीन प्रमुख खतरों में शामिल किया है जो वैश्विक वित्तीय स्थितियों को सख्त बना सकते हैं और बाजारों में बड़ी उथल-पुथल पैदा कर सकते हैं।
