इसरो ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित टेस्ट फैसिलिटी में 100 किलोन्यूटन क्षमता वाले एलएमई 1100 (LME 1100) लिक्विड मीथेन इंजन के फुल स्केल गैस जनरेटर का पहली बार सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह इंजन भारत के भविष्य के नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) और साल 2040 के मून मिशन की रीढ़ बनने वाला है।
इसरो की इस तकनीकी सफलता के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- गैस जनरेटर की भूमिका: गैस जनरेटर किसी भी रॉकेट इंजन का पावर हाउस होता है, जो अत्यधिक दबाव वाली गैसें पैदा कर टर्बो पंप को घुमाता है। महेंद्रगिरी में इस फुल स्केल टेस्ट की सफलता से इसरो की इंजीनियरिंग गणनाओं की सटीकता साबित होती है।
- मीथेन इंजन क्यों है खास: पारंपरिक केरोसिन और तरल हाइड्रोजन के मुकाबले लिक्विड मीथेन बेहद साफ जलती है जिससे इंजन पर कालिक नहीं जमती। इससे इंजन को बिना जटिल मरम्मत के बार-बार इस्तेमाल करना आसान हो जाता है। साथ ही, यह मंगल ग्रह जैसे अंतरग्रहीय अभियानों (ISRU) के लिए भी बेहद अनुकूल है।
- 3D प्रिंटिंग तकनीक का कमाल: इस इंजन के 70 प्रतिशत से अधिक पुर्जों को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग यानी अत्याधुनिक 3D प्रिंटिंग तकनीक से तैयार किया गया है, जिससे निर्माण का समय हफ्तों में सिमट गया है और रिसाव का खतरा भी टल गया है।
- भविष्य की तैयारी: इसरो समानांतर रूप से 2400 किलोन्यूटन के फुल फ्लो स्टेज्ड कंबशन साइकिल इंजन पर भी काम कर रहा है। ये दोनों इंजन मिलकर एनजीएलवी को भारी पेलोड उठाने की जरूरी ताकत देंगे, जिससे भारत के 2040 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री उतारने के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।
इसरो का यह स्वदेशी कदम यह साबित करता है कि भारत अब अंतरिक्ष विज्ञान में केवल दूसरों के नक्शे कदम पर नहीं चल रहा, बल्कि अपनी मौलिक तकनीकों के दम पर वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।
