रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय (Trilateral) फॉर्मेट में बातचीत शुरू करने की मंजूरी दे दी है। रूसी सरकारी चैनल के पत्रकार को दिए गए इंटरव्यू में पुतिन ने कहा कि रूस बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसका उद्देश्य केवल कुछ समय के लिए युद्ध रोकना नहीं, बल्कि स्थायी शांति समझौते के बाद रूस और यूक्रेन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह संभावित बातचीत इसी साल नवंबर के महीने में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में आयोजित की जा सकती है।
स्थायी शांति और क्षेत्रीय विवादों पर पुतिन का रुख
पुतिन ने स्पष्ट किया कि बातचीत का मकसद केवल युद्ध विराम नहीं बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था होना चाहिए। हालांकि, क्षेत्रीय नुकसान से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यूक्रेनी नेताओं के लिए युद्ध के परिणामस्वरूप संभावित क्षेत्रीय नुकसान पर चर्चा करना उचित नहीं है। उन्होंने पूर्वी यूक्रेन के उन क्षेत्रों को ऐतिहासिक रूप से रूसी भूमि बताया जिन पर रूस अपना दावा करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं के मुद्दे पर रूस और यूक्रेन के रुख में जमीन-आसमान का फर्क है, जिससे किसी भी शांति समझौते पर सहमति बनाना बेहद कठिन चुनौती होगी। 2022 के बाद से रूस ने क्रीमिया के अलावा यूक्रेन के लगभग 12% अतिरिक्त भू-भाग पर नियंत्रण हासिल कर लिया है, जिसमें लुहांस्क, डोनेट्स्क, जापोरिजिया और खेरसॉन के बड़े हिस्से शामिल हैं।
यूरोप की सुरक्षा और नाटो विस्तार पर चिंता
इंटरव्यू के दौरान पुतिन ने यह भी दोहराया कि रूस का यूरोप के साथ युद्ध करने का कोई इरादा नहीं है और यूरोपीय देश भी ऐसा नहीं चाहते हैं। उन्होंने भविष्य की बातचीत में यूरोप की व्यापक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को शामिल किए जाने की वकालत की। इस प्रकार पुतिन ने इस विवाद को केवल रूस-यूक्रेन तक सीमित न रखकर यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था और नाटो के विस्तार से जोड़ने का प्रयास किया है।
दूसरी ओर, अमेरिका और पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस की चिंताओं को संबोधित किया जाना चाहिए, लेकिन यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा भी किसी भी स्थायी समाधान का अहम हिस्सा है। पश्चिमी समर्थन और यूरोपीय देशों की भूमिका पर टिकी उम्मीदों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि नवंबर में होने वाली संभावित बैठकों में शांति का कोई ठोस मार्ग निकल पाता है या नहीं।
