चीन ने सुरंग खोदने वाली टनल बोरिंग मशीनों (TBM), उनके स्पेयर पार्ट्स और कठिन पहाड़ी इलाकों में इस्तेमाल होने वाले हैवी एक्सकेवेटर के निर्यात पर नए कड़े नियंत्रण लागू कर दिए हैं। हालांकि, चीन ने सीधे तौर पर भारत का नाम नहीं लिया है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला में देरी और अनिश्चितता पैदा करके भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को प्रभावित करने की कोशिश की है। भारत ने चीन की इस चाल का काउंटर प्लान तैयार कर लिया है, जिसकी जानकारी खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है।
भारत में स्वदेशी TBM निर्माण में बड़ी सफलता
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का एक वीडियो साझा करते हुए देश में टनल बोरिंग मशीनों के निर्माण की प्रगति पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने बताया कि पहले भारत इन मशीनों के लिए पूरी तरह विदेशों (विशेषकर चीन) पर निर्भर था। अब स्थिति बदल चुकी है:
- भारत में 8 मीटर व्यास वाली टनल बोरिंग मशीनें सफलतापूर्वक बनाई जा रही हैं।
- 15 मीटर व्यास वाली विशाल मशीनों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
- जल्द ही 16 मीटर से बड़ी मशीनों के निर्माण पर भी काम शुरू किया जाएगा।
- तमिलनाडु में टनल बोरिंग मशीनों के निर्माण का अत्याधुनिक संयंत्र स्थापित किया जा चुका है।
क्या हैं चीन के नए नियम और भारत के लिए चुनौती?
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने सुरंग खोदने वाले TBM उपकरण, मरम्मत तकनीक, वॉकिंग एक्सकेवेटर और कंक्रीट स्प्रेइंग मशीनों के निर्यात पर कड़े नियम लागू किए हैं। संवेदनशील या विवादित क्षेत्रों में उपकरण भेजने के लिए चीनी अधिकारियों से अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।
भारत में TBM की भारी मांग है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत समुद्र के नीचे सुरंग बनाने, विभिन्न शहरों के मेट्रो नेटवर्क और हिमालयी क्षेत्रों में रणनीतिक रेल लाइनों के निर्माण में TBM का इस्तेमाल होता है। चीन द्वारा सप्लाई रोकने पर परियोजनाओं की समय-सीमा और लागत पर बुरा असर पड़ सकता है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट और हिमालय की कठिन भौगोलिक स्थिति
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का लगभग 83% हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। इस प्रोजेक्ट में 16 सुरंगे और 19 पुल शामिल हैं।
हिमालय के नए और कच्चे पहाड़ों में चट्टानें बेहद कमजोर होती हैं, जिससे खुदाई के बाद जमीन अंदर की तरफ दबने लगती है। इस समस्या से निपटने के लिए भारत में बनने वाली स्वदेशी TBM के कटर हेड, सेफ्टी शील्ड और ड्राइव सिस्टम में विशेष तकनीकी बदलाव किए गए हैं ताकि मशीनें कमजोर जमीन पर भी अत्यधिक दबाव के साथ काम कर सकें।
चीन की चेतावनी में भारत के लिए अवसर
चीन का यह कदम भारत के लिए एक चेतावनी के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनने का बड़ा अवसर भी है। यद्यपि केवल मशीन का ढांचा बना लेना काफी नहीं है और कल-पुर्जों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर होने में समय लगेगा, लेकिन भारत का यह शुरुआती कदम चीन के एकाधिकार को तोड़ने और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सुरक्षित रखने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो रहा है।
