हर बच्चे का स्वस्थ जीवन और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बचाव बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से हर साल 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है। यह दिन पोलियो उन्मूलन के वैश्विक प्रयासों को गति देने, टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्यकर्मियों तथा स्वयंसेवकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके सहयोगी संगठन दुनिया को पोलियो मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
क्या है पोलियो और क्यों है खतरनाक?
पोलियो एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो पोलियो वायरस के कारण होती है। यह बीमारी मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद तंत्रिका तंत्र पर हमला कर सकता है और गंभीर मामलों में स्थायी लकवा पैदा कर सकता है। कुछ मामलों में यह सांस लेने वाली मांसपेशियों को प्रभावित कर जानलेवा भी बन सकता है।
पोलियो का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, लेकिन टीकाकरण के माध्यम से इससे बचाव संभव है। इसलिए बच्चों को निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार पोलियो की खुराक दिलाना बेहद जरूरी है।
भारत ने पोलियो उन्मूलन में हासिल की बड़ी सफलता
भारत ने पोलियो के खिलाफ लंबे समय तक व्यापक अभियान चलाया। देश में पल्स पोलियो कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1995 में हुई थी। इस अभियान के तहत पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए गए।
भारत में जंगली पोलियो वायरस का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में सामने आया था। इसके बाद लगातार निगरानी और टीकाकरण के प्रयासों के चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र, जिसमें भारत भी शामिल है, को 27 मार्च 2014 को पोलियो मुक्त प्रमाणित किया गया। यह भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि थी।
हालांकि, पोलियो मुक्त स्थिति बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण और वायरस की निगरानी जरूरी है। दुनिया के किसी अन्य हिस्से में वायरस का प्रसार होने पर संक्रमण दोबारा फैलने का खतरा बना रह सकता है।
पोलियो से बचाव में टीकाकरण की भूमिका
पोलियो से बच्चों को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण है। इसके लिए माता-पिता और अभिभावकों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- समय पर टीकाकरण: बच्चों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पोलियो की सभी आवश्यक खुराक दिलाएं।
- पल्स पोलियो अभियान में भागीदारी: अभियान के दौरान पात्र बच्चों को पोलियो की खुराक जरूर पिलाएं।
- छूटी हुई खुराक पूरी कराएं: यदि किसी बच्चे की निर्धारित खुराक छूट गई है, तो स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेकर उसे पूरा कराएं।
- स्वच्छता का ध्यान रखें: साफ पानी का उपयोग करें, भोजन को ढककर रखें और हाथों की नियमित सफाई करें।
- जागरूकता फैलाएं: परिवार और आसपास के लोगों को पोलियो टीकाकरण के महत्व के बारे में जानकारी दें।
ध्यान रखें कि नियमित टीकाकरण के साथ-साथ विशेष पोलियो अभियान भी महत्वपूर्ण हैं। अभियान के दौरान खुराक दिलाने के बावजूद बच्चे का नियमित टीकाकरण कार्यक्रम पूरा कराना आवश्यक है।
दुनिया को पोलियो मुक्त बनाने की चुनौती
वैश्विक स्तर पर पोलियो के मामलों में भारी कमी आई है, लेकिन इस बीमारी का पूर्ण उन्मूलन अभी भी चुनौती बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल से जुड़े संगठन टीकाकरण का दायरा बढ़ाने, संक्रमण की पहचान करने और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई करने पर जोर दे रहे हैं।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान में जंगली पोलियो वायरस का प्रसार जारी रहने के कारण दुनिया के अन्य देशों में भी इसके दोबारा पहुंचने का जोखिम बना हुआ है। ऐसे में टीकाकरण में किसी भी तरह की लापरवाही वैश्विक प्रयासों को प्रभावित कर सकती है।
विश्व पोलियो दिवस का संदेश: कोई भी बच्चा न छूटे
विश्व पोलियो दिवस हमें याद दिलाता है कि पोलियो उन्मूलन केवल सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक परिवार और समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है। माता-पिता, स्वास्थ्यकर्मी, स्वयंसेवक और सामाजिक संगठन मिलकर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।
इस अवसर पर संकल्प लें कि हर बच्चे को समय पर पोलियो की खुराक दिलाएंगे, टीकाकरण के प्रति जागरूकता फैलाएंगे और पोलियो मुक्त दुनिया बनाने के प्रयासों में सहयोग करेंगे। सामूहिक भागीदारी और निरंतर सतर्कता से ही आने वाली पीढ़ियों को इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है।
