प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 12 वर्ष पूरे होने पर देशवासियों को संबोधित किया। विजयादशमी के पावन अवसर पर शुरू हुए इस सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में यह कार्यक्रम देश के सामान्य नागरिकों के परिश्रम, पराक्रम और सेवा-भाव का गौरवगान करने का माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा उनके लिए किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं है।
संबोधन के मुख्य बिंदु :
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पारंपरिक हुनर और ‘वोकल फॉर लोकल’: प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में ‘खेती विरासत मिशन’ की पहल ‘नव-त्रिन्जन’ की सराहना की, जहाँ जैविक कपास और पारंपरिक बुनकरी से महिलाओं के जीवन में बदलाव आ रहा है। उन्होंने त्योहारों के इस सीजन में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को अपनाते हुए स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को प्राथमिकता देने की अपील की।
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पर्यावरण और जल संरक्षण: उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में स्थानीय लोगों और प्रशासन द्वारा ‘हेवल’ नदी और प्राकृतिक जल-स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की उन्होंने सराहना की। साथ ही, आगामी दिवाली और छठ पर्व पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने को कहा।
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स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक की ताकत: ‘ई-संजीवनी’ योजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि इसके जरिए अब तक देश में लगभग 50 करोड़ टेली-कौंसिलेशन किए जा चुके हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों में लोगों को त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।
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विज्ञान और अनुसंधान: चेन्नई के आईआईटी मद्रास में ‘सुधा गोपाल कृष्णन ब्रेन सेंटर’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ मानव मस्तिष्क की 3डी मैपिंग पर अभूतपूर्व काम हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश की शिवानी के अंगदान के फैसले को एक प्रेरणादायी कदम बताया।
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श्रीअन्न (मिल्ट्स) और विरासत: पूर्वोत्तर राज्यों (मेघालय और नागालैंड) में पारंपरिक बाजरा (मिल्ट्स) की खेती और उससे जुड़े नए उत्पादों के पुनरुद्धार की चर्चा की। साथ ही महर्षि वाल्मीकि जयंती, भाई परमानंद जी की 150वीं जयंती और सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित होने वाली ‘रन फॉर यूनिटी’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया।
