वर्ष 2025 भारत की विकास यात्रा में एक निर्णायक अध्याय के रूप में उभरा है। इस वर्ष नीतियों ने ज़मीन पर परिणाम दिखाए और सरकार की मंशा ठोस प्रभाव में बदली। ‘ईयर ऑफ रिफॉर्म्स’ विशेष श्रृंखला के तहत आकाशवाणी समाचार भारत के कराधान क्षेत्र में 2025 के दौरान हुई प्रगति पर यह रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहा है।
भारत के कर इतिहास में राज्य और नागरिकों के संबंधों में समय-समय पर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। वर्ष 1930 में महात्मा गांधी द्वारा चुनौती दिए गए दमनकारी नमक कर से लेकर 1970 के दशक में आयकर की अधिकतम दर 97.5 प्रतिशत तक पहुंचने का दौर, अत्यधिक करों ने अविश्वास, डर आधारित अनुपालन और व्यापक कर चोरी को जन्म दिया था। बीते आठ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए कर सुधारों ने और 2025 में उन्हें निर्णायक रूप से आगे बढ़ाते हुए इस विरासत से स्पष्ट रूप से अलग राह अपनाई है।
इस बदलाव का सबसे मजबूत आधार अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार बने हैं। वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने से भारत एकीकृत राष्ट्रीय बाजार में बदला, लेकिन कई टैक्स स्लैब, वर्गीकरण विवाद और अनुपालन की जटिलताएं बनी रहीं। वर्ष 2025 में जीएसटी प्रणाली को दो मुख्य स्लैब—5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत—में तर्कसंगत बनाया गया है। इसके साथ ही स्पष्ट वर्गीकरण, आसान पंजीकरण और सरल अनुपालन प्रक्रियाएं लागू की गई हैं।
इन सुधारों का असर उपभोग और राजस्व दोनों में साफ दिखाई दे रहा है। देश में अब तक की सबसे अधिक दिवाली बिक्री छह लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्ज की गई। नवरात्रि के दौरान भी मजबूत मांग देखने को मिली और अक्टूबर महीने में ऑटोमोबाइल बिक्री ने नए रिकॉर्ड बनाए। जीएसटी कटौती और आयकर राहत के चलते परिवारों को हर साल लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। बीमा प्रीमियम पर जीएसटी को शून्य कर दिया गया है, वहीं रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं और उपभोक्ता उत्पाद पहले से अधिक सस्ते हुए हैं।
आयकर सुधारों ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है। वर्ष 2014 में जहां आयकर छूट सीमा दो लाख रुपये थी, वह 2025 में बढ़कर 12 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह बदलाव न केवल करदाताओं पर बोझ कम करता है, बल्कि खपत और बचत दोनों को बढ़ावा देता है।
वर्ष 2025 के कर सुधार केवल वित्तीय पुनर्गठन नहीं हैं, बल्कि एक वैचारिक परिवर्तन का प्रतीक भी हैं। भरोसा, सरलता और पारदर्शिता अब भारत की कर प्रणाली के मूल आधार बन चुके हैं, जो आर्थिक विकास और स्वैच्छिक कर अनुपालन को नई गति दे रहे हैं।
