मुख्यमंत्री ने कहा है कि जब वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह ने पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की कमान संभाली थी, तब राज्य अराजकता और गुंडागर्दी के दौर से गुजर रहा था। उस समय सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों, गरीबों और युवाओं तक नहीं पहुंच पा रहा था और प्रदेश में कुशासन की स्थिति बनी हुई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर प्रदेश में अव्यवस्था और अराजकता थी, तो दूसरी ओर हिंदू समाज करीब 500 वर्षों की गुलामी से मुक्ति की आकांक्षा कर रहा था। ऐसे कठिन समय में कल्याण सिंह ने मजबूत नेतृत्व दिखाते हुए उत्तर प्रदेश को जातिवाद, धर्म के नाम पर फैली कटुता और प्रशासनिक अव्यवस्था से बाहर निकालने का काम किया।
उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह ने अपने सिद्धांतों और मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया। भगवान श्रीराम के आदर्शों का अनुसरण करते हुए उन्होंने सत्ता को त्यागना स्वीकार किया, लेकिन अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कल्याण सिंह का यह निर्णय भारतीय राजनीति के इतिहास में साहस, त्याग और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बन गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कल्याण सिंह का कार्यकाल आज भी सुशासन, नीतिगत स्पष्टता और समाज को नई दिशा देने के लिए याद किया जाता है। उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आम जन के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए।
