प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर दुनिया भर में रह रहे भारतीयों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विदेशों में बसे भारतीय न केवल अपने-अपने देशों में प्रगति और समृद्धि में योगदान दे रहे हैं, बल्कि भारत और विश्व के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका भी निभा रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय डायस्पोरा की भूमिका की सराहना करते हुए लिखा कि जहां भी भारतीय गए, उन्होंने वहां के समाज को समृद्ध किया और साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहे। उन्होंने दोहराया कि भारतीय प्रवासी देश के “राष्ट्रदूत” हैं, जिन्होंने भारत की संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने प्रवासी भारतीयों को भारत के और करीब लाने के लिए बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
प्रवासी भारतीय दिवस हर साल 9 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन विदेशों में रहने वाले भारतीयों के योगदान को सम्मानित करने और भारत के विकास में उनकी भूमिका को रेखांकित करने के लिए समर्पित है। यह आयोजन प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद और सहयोग का एक अहम मंच भी प्रदान करता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति को गति मिलती है।
9 जनवरी का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन वर्ष 1915 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। महात्मा गांधी को विश्व के सबसे महान प्रवासियों में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में भारत का स्वतंत्रता संग्राम आगे बढ़ा और देश के इतिहास की दिशा बदली। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में इस तारीख को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में चुना गया।
प्रवासी भारतीय दिवस कन्वेंशन की शुरुआत वर्ष 2003 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान हुई थी। इसका उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय से औपचारिक रूप से जुड़ना, उनके योगदान को पहचान देना और भारत के साथ उनके रिश्तों को और मजबूत बनाना था।
यह कार्यक्रम विदेश मंत्रालय का प्रमुख आयोजन है और इसे देश के विभिन्न शहरों में आयोजित किया जाता है। इसके माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता, विकास यात्रा और विरासत को प्रदर्शित किया जाता है, साथ ही प्रवासी भारतीयों को देश से सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है।
वर्ष 2015 के बाद विदेश मंत्रालय ने इसके स्वरूप में बदलाव किया और प्रवासी भारतीय दिवस कन्वेंशन को दो साल में एक बार आयोजित करने का निर्णय लिया। बीच के वर्षों में थीम आधारित सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है, जिससे विशेष क्षेत्रों पर केंद्रित चर्चा, संवाद और नेटवर्किंग को बढ़ावा मिलता है।
प्रवासी भारतीय दिवस का मुख्य उद्देश्य विदेशों में रह रहे भारतीयों द्वारा भारत के विकास में दिए गए योगदान को सम्मान देना, विश्व में भारत के प्रति समझ और सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ाना तथा वैश्विक भारतीय समुदाय के कल्याण से जुड़ी पहलों को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही यह मंच ज्ञान, कौशल और अनुभवों के आदान-प्रदान को भी सशक्त बनाता है।
इस अवसर पर दिए जाने वाले प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार को भारतीय डायस्पोरा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा उन अनिवासी भारतीयों, भारतीय मूल के व्यक्तियों या संगठनों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने विदेशों में भारत की छवि मजबूत करने, भारत से जुड़े मुद्दों का समर्थन करने और स्थानीय भारतीय समुदायों के कल्याण में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
