मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में यूपी हेल्थ टेक कॉन्क्लेव 1.0 का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और तकनीक के उपयोग से इसमें क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन का जिक्र करते हुए कहा कि इससे दूर-दराज के इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं और आने वाले समय में यह और प्रभावी होगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने क्लीनिकल ट्रायल और फार्मास्युटिकल से जुड़े नए एप का लोकार्पण भी किया। कॉन्क्लेव में हेल्थ टेक स्टार्टअप्स, मेडिकल डिवाइस निर्माण, डिजिटल हेल्थ और फार्मा अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल 40 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और दो एम्स (AIIMS) भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में भेदभाव रहित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार देखने को मिले हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश ने मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इसके अलावा प्रदेश में अब तक 5.5 करोड़ आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।
सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि अब स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क पर काम चल रहा है और इसे जल्द पूरा किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि बिना उचित परीक्षण के मरीजों को रेफर करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों को नए सिरे से प्रशिक्षण दिया जाए और उनकी जिम्मेदारी तय की जाए।
यह कॉन्क्लेव उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य, औषधि और अनुसंधान के क्षेत्र में हुई प्रगति को प्रदर्शित करने तथा मेडिकल टेक्नोलॉजी में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
