इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की पूरी संरचना के सभी पांच स्तरों—एप्लिकेशन, मॉडल, चिप, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा—पर एक साथ काम कर रहा है। स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के एक सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक एआई सेवाओं के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है।
अश्विनी वैष्णव ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) प्रमुख द्वारा भारत को “द्वितीय श्रेणी की एआई शक्ति” बताए जाने की टिप्पणी को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्टैनफोर्ड की रैंकिंग का हवाला देते हुए कहा कि एआई तैयारियों के मामले में भारत विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 70 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अगले 12 महीनों में करीब 50 अरब अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त निवेश की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अगले महीने आयोजित होने वाले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तकनीक न केवल भारत तक सीमित रहे, बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों तक भी पहुंचे।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में अब करीब दो लाख स्टार्टअप्स हैं और देश दुनिया के शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल है। उन्होंने बताया कि बीते एक दशक में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां अब डीप टेक पर खासा फोकस बढ़ा है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत आने वाले समय में दुनिया के शीर्ष चार या पांच सेमीकंडक्टर देशों में शामिल होगा।
मंत्री ने भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्विक चिप उत्पादन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा 28 से 90 नैनोमीटर श्रेणी में आता है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, ऑटोमोबाइल, रेलवे, रक्षा प्रणाली, टेलीकॉम उपकरण और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2030 तक 7 नैनोमीटर तकनीक हासिल करने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है।
दावोस में अश्विनी वैष्णव ने आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा और मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कैपलान से भी मुलाकात की। सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में उन्होंने कहा कि दुनिया भारत को वैश्विक नवाचार का एक प्रमुख चालक मान रही है।
