मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में दो महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया गया, जिनमें प्रदेश में रसोई गैस की उपलब्धता तथा सीमांत गांवों के विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
पहली बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों के साथ सभी जिलाधिकारियों ने दूरस्थ माध्यम से भाग लिया। बैठक में विभाग की ओर से बताया गया कि राज्य में रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है और उपभोक्ताओं तक समय पर आपूर्ति पहुंचाई जा रही है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी परिस्थिति में रसोई गैस की आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अवैध भंडारण, अनधिकृत बिक्री और कृत्रिम कमी पैदा करने के प्रयासों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए नियमित जांच, भंडार की समीक्षा और निगरानी अभियान तेज करने के निर्देश भी दिए गए।
दूसरी बैठक में सीमांत गांवों के सर्वांगीण विकास से संबंधित योजना की समीक्षा की गई। इस दौरान लगभग चार सौ दो करोड़ रुपये के नए विकास प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। इन प्रस्तावों के अंतर्गत गांवों में आवासीय पर्यटन सुविधाएं, ग्राम स्तरीय आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क, सामाजिक विकास, चिकित्सालय, खेल मैदान, आधुनिक अध्ययन कक्ष, लघु व्यायाम केंद्र, सौर ऊर्जा आधारित मार्ग प्रकाश तथा कृषि उन्नयन से जुड़े कार्य किए जाएंगे।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विकास कार्य पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं, ताकि सीमांत गांव अन्य क्षेत्रों के लिए उदाहरण बन सकें। उन्होंने यह भी कहा कि योजना से लोगों की आजीविका, आय और दीर्घकालिक लाभ का नियमित मूल्यांकन किया जाए तथा उसकी जानकारी समय-समय पर साझा की जाए।
बैठक में इस बात पर भी बल दिया गया कि विकास कार्य केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाने वाले सिद्ध हों।
