रामपुर की सियासत में शुक्रवार एक बार फिर बड़ा दिन साबित हुआ। प्रदेशभर की निगाहें उस फैसले पर टिकी थीं, जिसमें सपा नेता आज़म खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आज़म के खिलाफ अदालत अपना निर्णय सुनाने वाली थी। फैसला आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई और इसने न सिर्फ रामपुर, बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी।
अदालत ने दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आज़म को दोषी करार देते हुए सात साल की सजा सुनाई है। इससे सपा नेता आज़म खान के परिवार को बड़ा झटका लगा है और अब्दुल्ला की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
पूरा मामला क्या है?
यह मामला वर्ष 2019 में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है। आरोप था कि अब्दुल्ला आज़म ने अलग-अलग जन्मतिथि का उपयोग कर दो पासपोर्ट बनवाए।
- पहले पासपोर्ट में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी, जो शैक्षिक अभिलेखों के अनुसार सही थी
- जबकि दूसरे पासपोर्ट में 1990 की जन्मतिथि दी गई थी
- दूसरा पासपोर्ट (संख्या Z 4307442) 10 जनवरी 2018 को जारी हुआ था
- गलत जानकारी पाए जाने पर यह पासपोर्ट जब्त कर लिया गया
पुलिस जांच में अब्दुल्ला आज़म पर आरोप सही पाए गए और उन्हें आरोपपत्र में नामजद किया गया। यह मामला एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में चल रहा था। शुक्रवार को अब्दुल्ला को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जेल से ही पेश किया गया। इसके बाद अदालत ने फर्जी दस्तावेज पेश करने के मामले में सात साल की कैद और 50,000 रुपये जुर्माना लगाया।
तीसरी बड़ी सजा
यह अब्दुल्ला आज़म के खिलाफ तीसरी बड़ी सजा है। इससे पहले,
- जन्म प्रमाणपत्र फर्जीवाड़ा केस
- दो PAN कार्ड मामले
में भी उन्हें दोषी करार दिया जा चुका है।
दोपासपोर्ट मामले में फैसला आने के बाद माना जा रहा है कि अब आज़म खान और उनके बेटे पर कानूनी शिकंजा और मजबूत हो गया है। जन्मतिथि बदलने से जुड़े तीन मामलों में लगातार मिली सजाओं ने अब्दुल्ला की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। अब आगे इस मामले की कानूनी लड़ाई किस दिशा में बढ़ती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
