केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण (आईएंडबी) सचिव श्री संजय जाजू ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में चुनौतियाँ बढ़ी हैं, लेकिन इसके बावजूद मीडिया और मनोरंजन (एम एंड ई) उद्योग अभूतपूर्व विकास की क्षमता रखता है। वे मुंबई में आयोजित 12वें सीआईआई बिग पिक्चर समिट के उद्घाटन सत्र में “एआई युग – रचनात्मकता और वाणिज्य के बीच सेतु” विषय पर संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर श्री जाजू ने सीआईआई का श्वेत पत्र – “भारत की वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी रचनात्मक अर्थव्यवस्था के लिए प्राथमिक नीतिगत सुधार” भी जारी किया। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को वेव्स (World Audio Visual & Entertainment Summit) को एक केवल आयोजन नहीं, बल्कि निरंतर रचनात्मक आंदोलन के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में “हर वेव्स पिछली वेव्स पर आधारित होती है”, और सहयोग से ही भारत वैश्विक बाजार में अपनी जगह मजबूत कर सकता है।
◼ मनोरंजन भी सभ्यता का आधारस्तंभ
श्री जाजू ने कहा कि भोजन, वस्त्र और आवास की तरह मनोरंजन भी मानवीय जीवन का मूल स्तंभ है, जो समाज में खुशहाली, एकता और सद्भाव को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि मीडिया क्षेत्र का मूल्य केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि यह लोगों को जोड़ने और राष्ट्रों को एक सूत्र में पिरोने का मजबूत माध्यम है।
◼ भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का विशाल दायरा
आईएंडबी सचिव ने बताया कि भारत में रचनात्मक अर्थव्यवस्था एक करोड़ से ज़्यादा लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार देती है और देश के सकल घरेलू उत्पाद में 3 लाख करोड़ रुपये का योगदान करती है। उन्होंने भारत की पारंपरिक कहानी कहने की त्रयी—श्रुति, कृति और दृश्य कला—का विशेष उल्लेख किया, जिसे वेव्स समिट और राष्ट्रीय सिनेमा संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है।
इसके बावजूद वर्तमान समय में वैश्विक मीडिया और मनोरंजन बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी केवल 2% है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि हमें अपनी रचनात्मक क्षमता को ऐसे कंटेंट में बदलना होगा, जो विश्व स्तर पर स्वीकार्यता पा सके।
◼ एआई बदल रहा है कंटेंट बनाने और उपभोग करने का तरीका
श्री जाजू ने कहा कि एआई तेज़ी से मनोरंजन की दुनिया को परिवर्तित कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी—“नई तकनीकों को न अपनाने पर भारत अपनी वैश्विक हिस्सेदारी खो देगा।” उन्होंने जोर दिया कि भारत की “नारंगी अर्थव्यवस्था” का उदय, नए विचारों और कल्पनाशीलता के उभार का प्रतीक है। जरूरत है कि तकनीक और रचनात्मकता को एक प्लेटफ़ॉर्म पर लाया जाए।
◼ भारतीय कहानियाँ दुनिया तक जाएँ — यही सॉफ्ट पावर
श्री जाजू ने कहा कि भारत एक उभरती आर्थिक शक्ति है और हमारी कहानियों को पूरी दुनिया तक पहुँचना चाहिए। यही भारत की वास्तविक सॉफ्ट पावर है।
उन्होंने बताया कि सरकार की भूमिका एक सुविधाप्रदाता (Facilitator) की है—
- बेहतर नीतिगत वातावरण
- समान अवसर
- वित्तीय प्रोत्साहन
- कौशल अंतराल को खत्म करने की दिशा में कार्य
इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने मुंबई में भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) की स्थापना की मंजूरी दी है।
गोरेगांव की फिल्म सिटी में इसका परिसर दो वर्षों में पूरा होगा, जबकि एनएफडीसी परिसर पहले से कार्यरत है।
◼ निवेशकों और रचनाकारों के लिए प्लेटफ़ॉर्म
उन्होंने कहा कि सीआईआई वेव्स बाजार ने रचनाकारों को उचित निवेशक और खरीदारों से जुड़ने का अवसर दिया है। यह उद्योग के तेज़ विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।
◼ कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख हस्तियाँ
समिट में मौजूद प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों में शामिल थे:
- श्री गौरव बनर्जी, अध्यक्ष, सीआईआई नेशनल काउंसिल ऑन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट एवं एमडी–सीईओ, सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया
- श्री राजन नवानी, सह-अध्यक्ष, सीआईआई एम एंड ई एवं एमडी–सीईओ, जेटसिंथेसिस
- सुश्री गुंजन सोनी, सह-अध्यक्ष, सीआईआई एम एंड ई एवं कंट्री एमडी, यूट्यूब इंडिया
जारी श्वेत पत्र में भारत को वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व दिलाने हेतु व्यापक रोडमैप और नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए गए।
समारोह के दौरान सीआईआई एम एंड ई इन्वेस्टर्स मीट और सीआईआई वेव्स बाजार का भी उद्घाटन हुआ।
