अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार रोबोटिक तकनीक की सहायता से घुटने का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया है। इस उपलब्धि को संस्थान के लिए ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
एम्स रायबरेली की निदेशक डॉ. अमिता जैन ने इस सफलता की जानकारी देते हुए बताया कि रोबोटिक तकनीक से की गई सर्जरी पारंपरिक पद्धतियों की तुलना में कहीं अधिक सटीक और सुरक्षित होती है। इस प्रक्रिया में मरीज के घुटने की संरचना का डिजिटल विश्लेषण कर पहले से ही सर्जिकल योजना तैयार की जाती है, जिससे हड्डी की कटाई और इंप्लांट की स्थिति बिल्कुल सटीक तय की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि रोबोटिक सर्जरी के कारण ऑपरेशन के दौरान त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है, मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेज होती है। इस उपलब्धि से रायबरेली सहित आसपास के जिलों के मरीजों को अब विश्व स्तरीय ऑर्थोपेडिक उपचार अपने ही राज्य में उपलब्ध हो सकेगा, जिससे उन्हें बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
डॉ. अमिता जैन ने यह भी कहा कि एम्स रायबरेली का लक्ष्य भविष्य में एक संपूर्ण रोबोटिक ऑपरेशन थिएटर स्थापित करना है, ताकि जटिल सर्जरी को और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।
यह पहल केंद्र सरकार की सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को मजबूती प्रदान करती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
