औरंगाबाद मंडल कारा में बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और जेल से रिहाई के बाद उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से गौपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस पहल का मकसद कैदियों को ऐसा व्यावहारिक कौशल देना है, जिससे वे जेल से बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक जीवन जी सकें।
जेल अधीक्षक डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि वर्तमान प्रशिक्षण सत्र में करीब 100 बंदियों को पशुपालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान उन्हें गौपालन से जुड़ी बुनियादी और जरूरी जानकारियां दी जा रही हैं, जिनमें दुग्ध उत्पादन, चारा प्रबंधन और पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल शामिल है।
डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि गौपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर बंदी भविष्य में स्वरोजगार की दिशा में मजबूत कदम उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम बंदियों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करते हैं, जिससे वे समाज में लौटकर बेहतर जीवन की शुरुआत कर सकें।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जेल से रिहा होने के बाद गौपालन प्रशिक्षण प्राप्त कैदियों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपना काम शुरू कर सकें।
इस गौपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. श्याम किशोर द्वारा किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के सुधारात्मक प्रयास न केवल बंदियों के जीवन को नई दिशा देंगे, बल्कि समाज में उनके पुनर्वास को भी आसान बनाएंगे।
