31 अक्टूबर, 2025 तक देश भर में कुल 1,80,906 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) संचालित हैं, जो उप स्वास्थ्य केंद्रों (एसएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। एएएम प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के 12 पैकेज प्रदान करते हैं, जिनमें प्रजनन एवं शिशु देखभाल, संक्रामक रोग, गैर-संक्रामक रोग (एनसीडी), वृद्धजन देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य, तंत्रिका संबंधी रोग, मादक द्रव्य सेवन विकार, ओरल और ईएनटी स्वास्थ्य देखभाल तथा आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं।
एनपी-एनसीडी कार्यक्रम के अंतर्गत 31 अक्टूबर, 2025 तक उच्च रक्तचाप की 38.79 करोड़, मधुमेह की 36.05 करोड़, मुख कैंसर की 31.88 करोड़, स्तन कैंसर की 14.98 करोड़ और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की 8.15 करोड़ जांच की जा चुकी हैं। साथ ही, एएएम के माध्यम से 41.14 करोड़ टेली-परामर्श प्रदान किए गए, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित हो रही है।
एएएम में उपलब्ध दवाओं और निदानों की सूची का विस्तार किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 172 दवाएं और 63 निदान उपलब्ध हैं, जबकि राज्य स्वास्थ्य केंद्रों में 106 दवाएं और 14 निदान मौजूद हैं। इस पहल से सामुदायिक स्तर पर एनसीडी प्रबंधन, सामान्य ओपीडी सेवाओं और मुफ्त दवाओं की पहुंच में वृद्धि हुई है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में एएएम के लिए राज्य कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (एसपीआईपी) अनुमोदन और व्यय क्रमशः 4,346.60 करोड़ और 2,233.53 करोड़ (2022-23), 3,909.67 करोड़ और 1,590.70 करोड़ (2023-24), तथा 3,051.15 करोड़ और 1,211.02 करोड़ (2024-25) रहा।
नीति आयोग के विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) द्वारा जुलाई 2024 में एएएम कार्यक्रम का मूल्यांकन शुरू किया गया, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, डिजिटल स्वास्थ्य उपकरणों का उपयोग और अग्रिम पंक्ति सेवाओं तक पहुंच में सुधार की पुष्टि हुई। हालांकि, मानव संसाधन, कौशल प्रशिक्षण, दवाओं और निदानों की निरंतर उपलब्धता, डिजिटल इंटरऑपरेबिलिटी और सामुदायिक जागरूकता को और सुदृढ़ करने की सिफारिश की गई है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित निगरानी, समीक्षा बैठकें और सामान्य समीक्षा मिशन (सीआरएम) आयोजित किए जाते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने यह जानकारी राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।
