बागेश्वर। कुमाऊं की काशी के नाम से प्रसिद्ध बागेश्वर में होली का उत्साह अब चरम पर पहुंचने लगा है। चतुर्दशी की पारंपरिक होली के अवसर पर यहां रंग, संगीत और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। इस खास मौके पर आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में होल्यार चौक बाजार में एकत्र हुए और पारंपरिक गीत गाते-बजाते बाबा बागनाथ मंदिर की ओर प्रस्थान किया।
बमराड़ी, बिलौना, आरे, खरई पट्टी सहित दर्जनों गांवों से पहुंचे होल्यारों ने ढोलक की थाप, मंजीरों की झंकार और फाग गीतों की मधुर स्वर-लहरियों के बीच पूरे नगर को फागुन के रंग में रंग दिया। मंदिर परिसर में सामूहिक खड़ी होली का भव्य आयोजन हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने बाबा बागनाथ को अबीर-गुलाल अर्पित कर सुख-समृद्धि और मंगल जीवन की कामना की।
बागेश्वर की बैठकी और खड़ी होली कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। आज भी यहां यह परंपरा पूरी श्रद्धा, उल्लास और सामूहिक सहभागिता के साथ जीवंत रूप में निभाई जा रही है।
होली पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी लोग भी अपने गांव लौट आए हैं, जिससे क्षेत्र में उत्सव का माहौल और अधिक रंगीन और खास बन गया है। पारंपरिक लोक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का यह संगम बागेश्वर की पहचान को और मजबूत करता है।
