बिहार में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है। सीतामढ़ी जिले के परिहार प्रखंड की बथुआरा पंचायत को बाल विवाह मुक्त घोषित किए जाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। लगभग 20 हजार आबादी और पाँच गाँवों वाली इस पंचायत में पिछले पाँच वर्षों से चलाए जा रहे विशेष जागरूकता अभियान ने अब ठोस परिणाम देना शुरू कर दिया है। यह उपलब्धि जिलाधिकारी रिची पांडेय के निर्देशन में जिला प्रशासन, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (बचपन बचाओ आंदोलन), विशेष किशोर पुलिस इकाई और ग्राम पंचायत के संयुक्त तथा सतत प्रयासों का नतीजा है।
अभियान के तहत टीमों ने घर–घर जाकर लोगों से संवाद किया, बाल विवाह के दुष्परिणाम समझाए और छात्र–छात्राओं के बीच भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए पंचायत ने समाज के सभी वर्गों को इस मुहिम से जोड़ा, जिसके परिणामस्वरूप पंचायत क्षेत्र में बाल विवाह की कुरीति पर पूरी तरह रोक लगाने में सफलता मिली। अब बथुआरा पंचायत को औपचारिक रूप से बाल विवाह मुक्त घोषित करने के लिए विशेष कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
इस सफलता पर पंचायत के मुखिया धनेश्वर पासवान द्वारा गाया गया जागरूकता गीत – “जनता के रहे ईहे सरोकार हो… अठारह के बाद बियाहल जाई बिटिया हमार हो…” – सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों को बाल विवाह के खिलाफ खड़े होने का संदेश दे रहा है। बथुआरा पंचायत की यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे बिहार के लिए एक प्रेरणास्रोत बनती जा रही है, जो दिखाती है कि सतत जनजागरूकता और सामूहिक प्रयासों से सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
