बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का 20वां संस्करण सोमवार, 2 फरवरी 2026 को राज्य विधानसभा में प्रस्तुत किया गया। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि बिहार ने वर्ष 2024-25 के दौरान 13.1 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत 9.8 प्रतिशत से काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की मजबूत आर्थिक नीतियों, निवेश वृद्धि और विकास उन्मुख योजनाओं का परिणाम है।
वित्त मंत्री ने कहा कि बिहार वर्तमान समय में उच्च विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ क्षेत्रीय विविधीकरण, निवेश को बढ़ावा देने, मानव संसाधन विकास, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है, जिससे समाज के हर वर्ग को विकास का लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का कुल व्यय लगातार बढ़ा है। वर्ष 2020-21 में यह 1.66 लाख करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2024-25 में 2.82 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, ऊर्जा क्षेत्र, परिवहन नेटवर्क, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि क्षेत्र में निवेश को प्राथमिकता दी है, जिससे राज्य की आर्थिक नींव मजबूत हो रही है।
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि बिहार की प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान कीमतों पर यह वर्ष 2020-21 में 46,412 रुपये से बढ़कर 2024-25 में 76,490 रुपये हो गई है। वहीं स्थिर कीमतों पर यह आंकड़ा 30,159 रुपये से बढ़कर 40,973 रुपये तक पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों में लगातार विस्तार हो रहा है।
अर्थशास्त्री सुधांशु कुमार ने कहा कि बिहार की कुल आर्थिक वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही है, जो राज्य के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय अभी भी देश में सबसे कम स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार को राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने के लिए तेज और निरंतर विकास दर बनाए रखने की जरूरत है। इसके लिए औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना होगा।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वर्ष 2024-25 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर कीमतों पर 8.6 प्रतिशत और वर्तमान कीमतों पर 13.1 प्रतिशत बढ़ा है। स्थिर कीमतों पर यह बढ़कर 5,31,372 करोड़ रुपये और वर्तमान कीमतों पर 9,91,997 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राज्य की मजबूत आर्थिक प्रगति को दर्शाता है।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, द्वितीयक क्षेत्र में स्थिर कीमतों पर 11.1 प्रतिशत और वर्तमान कीमतों पर 15.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। तृतीयक क्षेत्र में क्रमशः 8.9 प्रतिशत और 13.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं प्राथमिक क्षेत्र में स्थिर कीमतों पर 4.1 प्रतिशत और वर्तमान कीमतों पर 9.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित रूप से आगे बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सरकार इसी तरह बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित करती रही, तो आने वाले वर्षों में बिहार की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 राज्य की आर्थिक दिशा और विकास की संभावनाओं को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।
