बिहार विधानसभा अब पूरी तरह से डिजिटल होने की ओर बढ़ रही है। यह एक ऐतिहासिक कदम है, जिसका उद्देश्य कार्यवाही को अधिक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। 1 दिसंबर से शुरू होने वाले सत्र में, सभी विधायकों को प्रश्न पूछने और पूरक प्रश्न दर्ज कराने के लिए टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल के साथ, बिहार विधानसभा देश में तकनीकी बदलाव की मिसाल कायम करेगी।
डिजिटल सदन की नई व्यवस्था
टैब से सवाल: अब विधायकों को अपनी सीटों पर टैबलेट मिलेंगे। वे इन टैबलेट्स पर अपने प्रश्न और पूरक प्रश्न सीधे टाइप करके भेज सकेंगे। यह बदलाव कार्यवाही को तेज और अधिक सुविधाजनक बनाएगा।
कागज की बचत: डिजिटल होने से भारी मात्रा में कागज का उपयोग कम होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। यह पेपरलेस सदन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पारदर्शिता: ‘नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन’ (NeVA) योजना के तहत, बिल पेश करने, प्रश्न पूछने और चर्चा करने सहित सभी विधायी कार्य डिजिटल माध्यम से होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन के माध्यम से सभी जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी।
विधान परिषद में यह व्यवस्था पहले ही लागू हो चुकी है। विधानसभा में टैबलेट लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि नए सदस्यों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
18वीं बिहार विधानसभा का पहला सत्र 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है।
* 1 दिसंबर: नए सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी।
* 2 दिसंबर: विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा।
* 3 दिसंबर: विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राज्यपाल का अभिभाषण होगा।
* 4 दिसंबर: राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी और सरकार जवाब देगी।
* 5 दिसंबर: द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी पर बहस होगी, जिसके बाद संबंधित विनियोग विधेयक पेश किया जाएगा।
विधानमंडल सत्र को लेकर विधानसभा के मुख्य भवन में सभापति अवधेश नारायण सिंह की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में सुरक्षा, ट्रैफिक, चिकित्सा, सफाई और पार्किंग जैसी सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने की योजना बनाई गई।
संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि 18वीं विधानसभा का यह पहला सत्र है, इसलिए नए विधायकों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। बैठक में गृह विभाग के सचिव प्रणव कुमार, एडीजी डॉ. कमल किशोर सिंह, डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम, एसएसपी कार्तिकेय शर्मा, नगर आयुक्त यशपाल मीणा समेत कई अधिकारी मौजूद थे। इस पहल से डिजिटल बिहार का सपना साकार होगा।
बिहार विधानसभा का यह पेपरलेस सदन बनने का प्रयास न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। यह बिहार सत्र आधुनिकता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। क्या आप इस डिजिटल पहल का समर्थन करते हैं? अपनी राय कमेंट सेक्शन में बताएं!
