प्राकृतिक आपदाओं की विभीषिका से जूझ रहे राज्यों को संबल प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने वर्ष 2025 के दौरान आई विनाशकारी बाढ़, अचानक आई बाढ़, बादल फटने जैसी घटनाओं, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ से प्रभावित राज्यों के लिए 1,912.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता राशि को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस विशेष राहत पैकेज के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के लिए 15.70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विषम परिस्थितियों में केंद्र द्वारा प्रदान किए गए इस अतिरिक्त सहयोग के लिए केंद्रीय गृह मंत्री के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है।
यह समस्त आर्थिक सहायता राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के माध्यम से वितरित की जाएगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों, विस्थापितों के पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को गति दी जा सके। केंद्र सरकार ने इस बात पर बल दिया है कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार प्राकृतिक संकट के समय राज्यों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आपदा की स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाना और प्रभावित राज्यों को सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है। यह अतिरिक्त सहायता राशि उन संसाधनों के अलावा है जो राज्यों को पूर्व में ही आवंटित किए जा चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन के लिए पहले ही व्यापक स्तर पर धन जारी किया है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के माध्यम से अट्ठाइस राज्यों को 20,735.20 करोड़ रुपये की बड़ी राशि भेजी गई है, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के अंतर्गत इक्कीस राज्यों को 3,628.18 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। इसके साथ ही भविष्य के जोखिमों को कम करने और दीर्घकालिक सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष से तेईस राज्यों को 5,373.20 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष से इक्कीस राज्यों को 1,189.56 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है। सरकार का यह कदम आपदा प्रबंधन की दिशा में एक समग्र और दूरदर्शी दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है।
