पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद आज बाजार में स्थिरता देखने को मिली। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी क्रूड वायदा करीब 1.4 प्रतिशत बढ़कर 72.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड लगभग 1.9 प्रतिशत की तेजी के साथ शुरुआती कारोबार में 79.2 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह उछाल ईरान द्वारा तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर किए गए जवाबी हमलों के बाद आया है। इसके साथ ही रणनीतिक रूप से अहम Strait of Hormuz के जरिए तेल आपूर्ति में संभावित बाधा को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया भर में होने वाली कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए इसकी अहमियत और अधिक है, क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल आयात का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतों में और तेज बढ़ोतरी संभव है। निवेश बैंक Morgan Stanley ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति में लंबी अवधि तक व्यवधान बना रहा तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। तेल कीमतों में वृद्धि से परिवहन लागत, महंगाई और औद्योगिक उत्पादन पर दबाव बढ़ने की आशंका है। ऐसे में निवेशक और सरकारें पश्चिम एशिया की स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
