काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने मंगलवार को संयुक्त स्वास्थ्य अनुसंधान को और मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण हाई-लेवल बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाकर एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान रोडमैप तैयार करना था। यह जानकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साझा की।
यह बैठक राजधानी दिल्ली स्थित सीएसआईआर साइंस सेंटर में आयोजित की गई, जिसका सह-अध्यक्षत्व सीएसआईआर की डायरेक्टर जनरल डॉ. एन. कलैसेल्वी और आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल व स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने किया।
बैठक के दौरान दोनों संस्थानों ने कई प्रमुख मुद्दों की समीक्षा की। इनमें सीएसआईआर द्वारा विकसित मॉलिक्यूल्स के क्लिनिकल ट्रायल्स, आईसीएमआर द्वारा समर्थित उन्नत शोध केंद्रों की स्थिति, तथा मौजूदा संयुक्त परियोजनाओं की प्रगति का विस्तार से मूल्यांकन शामिल था।
विशेषज्ञों ने नई दवाओं के विकास की दिशा में दोनों संगठनों की भूमिका पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने सिस्टमैटिक क्लिनिकल ट्रायल्स, बड़े जानवरों पर टॉक्सिसिटी टेस्टिंग, तथा दवा विकास में वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में वेस्ट-वॉटर सर्विलांस को अस्पतालों, शहरों और समुदायों में विस्तारित करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया, ताकि विभिन्न रोगजनकों (pathogens) की निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सके। साथ ही, ‘वन हेल्थ मिशन’ के अंतर्गत दोनों संस्थानों के संयुक्त प्रयासों को और संगठित करने पर सहमति बनी।
सीएसआईआर-आईसीएमआर पीएचडी कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान युवा शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर बढ़ाने और आईसीएमआर फेलोशिप को सीएसआईआर फेलोशिप से जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा गया। डॉ. कलैसेल्वी और डॉ. बहल ने जोर देकर कहा कि सीएसआईआर की वैज्ञानिक क्षमता और आईसीएमआर के सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को मिलाकर काम करने से देश को व्यापक और प्रभावशाली परिणाम प्राप्त होंगे।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों संस्थानों ने यह भी माना कि तकनीकी क्षेत्रों में संयुक्त विकास के लिए समयबद्ध प्रगति, बेहतर समन्वय और स्ट्रक्चर्ड मैकेनिज्म की आवश्यकता है। इसी दिशा में उन्होंने एक नई डिजिटली नियंत्रित मेडिकल इमरजेंसी ड्रोन सेवा के प्रस्ताव पर चर्चा की, जिसे दोनों संस्थान संयुक्त रूप से विकसित कर सकते हैं।
बैठक के अंत में विशेषज्ञों ने बायोमेडिकल साइंस, डायग्नोस्टिक्स, डिजिटल हेल्थ और पर्यावरणीय स्वास्थ्य निगरानी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि स्वास्थ्य अनुसंधान को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
