पूर्वी चंपारण जिले में विश्व एड्स दिवस के अवसर पर एक जागरूकता रैली निकाली गई। सदर अस्पताल से शुरू हुई इस रैली का नेतृत्व स्वास्थ्य प्रबंधक ने किया। रैली में एएनएम स्कूल की छात्राओं, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और अन्य महिला-पुरुष कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली का मुख्य नारा था, “एड्स को भगाना है।”
यह रैली सदर अस्पताल से चलकर चरखा पार्क तक गई और फिर वापस अस्पताल परिसर में समाप्त हुई। स्वास्थ्य प्रबंधक कौशल दुबे ने सभी एएनएम को निर्देश दिया कि वे मरीजों को एड्स के प्रति जागरूक करें, क्योंकि जिले में एड्स के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं।
दरअसल, पूर्वी चंपारण एड्स के मामलों में राज्य में दूसरे स्थान पर है। चिंता की बात यह है कि स्कूली बच्चों से लेकर नवविवाहितों तक में एचआईवी के मामले सामने आ रहे हैं। जिले में एड्स मरीजों की संख्या दस हजार से अधिक बताई जा रही है, जबकि लगभग दो हजार लोग विंडो पीरियड में निगरानी पर रखे गए हैं। एचआईवी की गंभीरता को देखते हुए अब किसी भी बीमारी के इलाज से पहले इसकी जांच अनिवार्य कर दी गई है।
इस अवसर पर डॉ. चंद्र सुभाष ने कहा कि रैली का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है और यह संदेश देना है कि एड्स से पीड़ित लोगों को अछूत समझना गलत है। उन्होंने कहा कि हमें उन्हें सहयोग और समर्थन देने की आवश्यकता है।
एएनएम ट्रेनिंग स्कूल की छात्रा बबिता कुमारी ने कहा कि सरकार ने एड्स रोकथाम के लिए कई उपाय किए हैं और इसे छुपाने के बजाय चर्चा और परामर्श के माध्यम से इससे बचाव संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि कई कार्यक्रमों और सुरक्षा उपायों के जरिए दांपत्य जीवन और परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है, और यदि हम एकजुट होकर काम करें तो 90% तक लोग इस बीमारी से बच सकते हैं।
स्वास्थ्यकर्मी मोनिका ने इस जागरूकता अभियान के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि लोगों को यह समझाना आवश्यक है कि एचआईवी न तो छूने से फैलता है और न ही साथ रहने से। उन्होंने सुरक्षित संबंध और एक जीवनसाथी के प्रति निष्ठा पर जोर दिया। स्वास्थ्यकर्मी नीलिमा श्रीवास्तव ने लोगों से सुरक्षित रहने और असुरक्षित संबंधों से बचने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई गर्भवती महिला एचआईवी संक्रमित है, तो उचित उपचार से वह अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकती है।
यह खबर पूर्वी चंपारण में एड्स की स्थिति और जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों पर प्रकाश डालती है, साथ ही बीमारी से बचाव के उपायों पर भी जोर देती है।
