प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल-फलाह विश्वविद्यालय के प्रबंध ट्रस्टी और चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी तथा अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दायर की है। एजेंसी ने कहा कि यह शिकायत अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह विश्वविद्यालय और उससे जुड़े संस्थानों से संबंधित अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के कथित सृजन और धनशोधन के मामले में सक्षम पीएमएलए अदालत में दाखिल की गई है।
ईडी ने एक बयान में बताया कि उसने हरियाणा स्थित इस समूह से जुड़े लगभग 140 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। एजेंसी की जांच पिछले साल दिल्ली के लाल किले के पास कार विस्फोट के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। ईडी ने कहा कि अब तक अपराध की आय (पीओसी) लगभग 493 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो नियामकों और हितधारकों को धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से गलत जानकारी देकर और उसके परिणामस्वरूप दाखिले व फीस वसूली के माध्यम से अर्जित की गई थी।
एजेंसी ने आगे कहा कि जांच में जवाद अहमद सिद्दीकी की सक्रिय भूमिका सामने आई है। उन्होंने अल-फलाह समूह पर पूर्ण प्रभुत्व स्थापित कर रखा था और अवैध धन के प्रमुख लाभार्थी पाए गए हैं। ईडी ने यह भी बताया कि प्रबंध ट्रस्टी और चांसलर होने के नाते सिद्दीकी के पास पूर्ण प्रशासनिक, वित्तीय और परिचालन नियंत्रण था, जबकि अन्य पदाधिकारी केवल नाममात्र या प्रॉक्सी के रूप में कार्य कर रहे थे।
