यूरोपीय संघ (EU) ने अमेरिका से अपने व्यापारिक वादों का सम्मान करने और स्थिति पर पूरी स्पष्टता देने की मांग की है। यह प्रतिक्रिया तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने की घोषणा की। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (International Emergency Economic Powers Act) के तहत लगाए गए पुराने टैरिफ को अमान्य करार दिया था।
एक आधिकारिक बयान में यूरोपीय संघ ने कहा कि 15 प्रतिशत टैरिफ की मौजूदा स्थिति निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी ट्रांसअटलांटिक व्यापार और निवेश के लिए अनुकूल नहीं है। यह वही ढांचा है जिस पर दोनों पक्षों ने अगस्त 2025 के EU-US संयुक्त बयान में सहमति जताई थी। यूरोपीय संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “समझौता, समझौता ही होता है” और अमेरिका को अपने वादों का पालन करना चाहिए, जैसे कि यूरोपीय संघ अपने दायित्वों पर कायम है।
यूरोपीय संघ ने यह भी मांग की कि टैरिफ दरें पूर्व सहमति से आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। पहले हुए समझौते के तहत अधिकांश यूरोपीय वस्तुओं पर 15 प्रतिशत टैरिफ तय था, जबकि कुछ उत्पादों जैसे विमानों और उनके स्पेयर पार्ट्स पर शून्य टैरिफ लागू किया गया था।
यह विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले अस्थायी रूप से सभी आयातों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया और एक दिन बाद इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। इसके बाद Supreme Court of the United States ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रशासन ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम का उपयोग करते हुए व्यापक आयात शुल्क लगाकर अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कर लगाने की प्राथमिक शक्ति मुख्य रूप से कांग्रेस के पास निहित है।
यूरोपीय संघ का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियां वैश्विक व्यापार स्थिरता के लिए अनुकूल नहीं हैं और दोनों पक्षों को पूर्व सहमति के आधार पर पारदर्शी और संतुलित समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
