भूराजनैतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से वैश्विक आर्थिक चिंता बढ़ने के बीच विदेशी निवेशकों ने मार्च के पहले दो सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में धन निकाला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 52 हजार 704 करोड़ रुपये वापस ले लिए, जिससे बाजार में दबाव की स्थिति बनी रही।
जमा संस्थानों के आंकड़ों के अनुसार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस दौरान भारतीय ऋण बाजार से भी 889 करोड़ रुपये की निकासी की। इस तरह समीक्षा अवधि में भारतीय पूंजी बाजार से कुल शुद्ध निकासी 60 हजार 269 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
यह निकासी फरवरी महीने में आए मजबूत निवेश प्रवाह के बाद अचानक बदला हुआ रुख माना जा रहा है। फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22 हजार 615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों में किसी एक महीने का सबसे बड़ा निवेश प्रवाह था।
इसके पहले विदेशी निवेशक लगातार तीन महीनों तक भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली करते रहे थे। जनवरी में 35 हजार 962 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी, जबकि दिसंबर में 22 हजार 611 करोड़ रुपये और पिछले वर्ष नवंबर में 3 हजार 765 करोड़ रुपये बाजार से बाहर निकाले गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण वैश्विक निवेशकों का जोखिम उठाने का रुझान कमजोर हुआ है। इसके चलते उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सावधानी बढ़ी है और भारतीय बाजार भी इससे प्रभावित हुआ है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां, तेल की कीमतें और प्रमुख देशों की मौद्रिक नीतियां विदेशी निवेशकों के निर्णय को प्रभावित करेंगी। यदि वैश्विक तनाव बना रहता है तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
