खगोलविदों ने नासा के केपलर अंतरिक्ष टेलीस्कोप के डेटा का विश्लेषण करते हुए एक संभावित पृथ्वी जैसी ग्रह HD 137010 b की पहचान की है। यह ग्रह आकार में पृथ्वी के लगभग समान है, लेकिन इसके तापमान में बड़ा अंतर हो सकता है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, यह ग्रह संभवतः अपने तारे के चारों ओर ऐसा मार्ग अपनाता है, जो पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर के मार्ग के समान है, लेकिन सतह का तापमान मार्स की तुलना में और भी ठंडा हो सकता है।
पृथ्वी जैसी कक्षा और रहने योग्य क्षेत्र:
HD 137010 b वर्तमान में “उम्मीदवार” के रूप में वर्गीकृत है, यानी इसकी उपस्थिति की पुष्टि के लिए और अवलोकन आवश्यक हैं। प्रारंभिक गणनाओं के अनुसार यह ग्रह लगभग एक वर्ष में अपनी कक्षा पूरी करता है। यह अपने तारे के “रहने योग्य क्षेत्र” के बाहरी किनारे के पास स्थित है, जहां उपयुक्त वायुमंडल होने पर सतह पर तरल पानी मौजूद हो सकता है। यदि इसकी पुष्टि हो जाती है, तो यह पहला पृथ्वी आकार का एक्सोप्लैनेट हो सकता है जो एक उज्जवल, सूर्य जैसी तारे के सामने वार्षिक रूप से गुजरता है।
मार्स से भी ठंडा ग्रह:
इसके बावजूद, ग्रह को पृथ्वी जितनी गर्मी और रोशनी नहीं मिलती। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह ग्रह अपने तारे से पृथ्वी की तुलना में केवल एक तिहाई ही ऊर्जा प्राप्त करता है। सतही तापमान अनुमानित रूप से माइनस 68 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है, जबकि मंगल का औसत तापमान माइनस 65 डिग्री सेल्सियस है।
पुष्टि की चुनौती:
इस ग्रह की पुष्टि के लिए बार-बार ट्रांज़िट यानी ग्रह के अपने तारे के सामने से गुजरने की घटना को देखना जरूरी है। केपलर के K2 मिशन के दौरान केवल एक ट्रांज़िट देखा गया है। वार्षिक कक्षाओं के कारण इसे दोहराने वाले ट्रांज़िट को पकड़ना कठिन होगा।
भविष्य में अनुसंधान:
नासा का TESS और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का CHEOPS उपग्रह इसकी पुष्टि में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, और उन्नत अंतरिक्ष दूरबीनों की आवश्यकता पड़ सकती है।
मौसम और रहने की संभावना:
कठोर शीतलता के बावजूद, यदि ग्रह का वायुमंडल घना और CO2 में समृद्ध है, तो सतह पर तरल पानी मौजूद हो सकता है। मॉडलिंग से अनुमान है कि 40% संभावना है कि ग्रह “संरक्षित” रहने योग्य क्षेत्र में हो, जबकि 51% संभावना है कि यह “सकारात्मक” रहने योग्य क्षेत्र में हो। साथ ही लगभग 50% संभावना है कि यह क्षेत्र के बाहर हो।
शोध और प्रकाशन:
यह खोज The Astrophysical Journal Letters में 27 जनवरी 2026 को प्रकाशित हुई। अध्ययन का नेतृत्व ऑस्ट्रेलिया के University of Southern Queensland के खगोल विज्ञान Ph.D. छात्र Alexander Venner ने किया था, जो वर्तमान में Max Planck Institute for Astronomy, Heidelberg, Germany में पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता हैं।
Credits: नासा केपलर डेटा, Alexander Venner और अंतरराष्ट्रीय शोध टीम
