सिख पंथ की चढ़दी कला और वीरता के प्रतीक राष्ट्रीय पर्व होला मोहल्ला की औपचारिक शुरुआत गुरुद्वारा किला आनंदगढ़ साहिब में जयकारों की गूंज के बीच पांच पारंपरिक नगाड़े बजाकर की गई। तख्त श्री केशगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गुड़गज्ज ने अरदास कर इस ऐतिहासिक पर्व का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर उन्होंने संगतों को होला मोहल्ला के इतिहास और इसके धार्मिक महत्व की जानकारी दी तथा आरंभ की अरदास कर सभी को पर्व की बधाई दी। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु की फौज अत्यंत प्रिय है और देश-विदेश से संगतें श्री आनंदपुर साहिब की पावन धरती पर होला मोहल्ला के अवसर पर पहुंचकर गुरु घर की खुशियां प्राप्त करती हैं।
उन्होंने बताया कि होला मोहल्ला दो चरणों में मनाया जाता है। पहला चरण श्री कीरतपुर साहिब और दूसरा चरण श्री आनंदपुर साहिब में आयोजित होता है। परंपरा के अनुसार पहले चरण की शुरुआत से पूर्व श्री आनंदपुर साहिब स्थित किला आनंदगढ़ साहिब में रात 12 बजे कौम के जत्थेदार और पंथ की प्रमुख हस्तियां पांच पारंपरिक नगाड़े और नरसिंगे बजाकर जयकारों के साथ पर्व का आगाज करती हैं।
इस दौरान तख्त श्री केशगढ़ साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी जोगिंदर सिंह, मैनेजर मलकीत सिंह, अतिरिक्त मैनेजर हरदेव सिंह, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सदस्य भाई अमरजीत सिंह चावला, भाई दलजीत सिंह भिंडर, किला आनंदगढ़ साहिब के प्रमुख बाबा सतनाम सिंह, संत बाबा कश्मीर सिंह भूरी वाले, बाबा सुखविंदर सिंह भूरी वाले, बाबा गुरदेव सिंह और शहीदी बाग के बाबा जरनैल सिंह सहित अनेक संत-महापुरुष और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
