न्याय प्रणाली को अधिक मानवीय, सुरक्षित और पीड़ित-अनुकूल बनाने की दिशा में आज होशियारपुर जिला अदालत परिसर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की माननीय न्यायाधीश एवं सत्र मंडल की प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस मीनाक्षी आई. मेहता ने आज जिला अदालत परिसर में नवनिर्मित “संवेदनशील गवाह बयान केंद्र” (Vulnerable Witness Deposition Centre) का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र अग्रवाल सहित न्यायिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। अदालत परिसर पहुँचने पर पंजाब पुलिस की टुकड़ी द्वारा जस्टिस मेहता को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया।
उद्घाटन के बाद संबोधित करते हुए जस्टिस मेहता ने बताया कि इस केंद्र की स्थापना विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और अन्य संवेदनशील पीड़ितों से संबंधित मामलों में गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य गवाहों को एक ऐसा सुरक्षित, सम्मानजनक और तनाव-रहित वातावरण प्रदान करना है जहाँ वे बिना किसी डर या दबाव के अपनी बात कह सकें। अक्सर देखा जाता है कि अदालती कार्यवाही के दौरान पीड़ित या गवाह काफी मानसिक तनाव में होते हैं, लेकिन यह केंद्र उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से सहायक माहौल उपलब्ध कराएगा।
यह केंद्र आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस है, जिसमें अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम और गोपनीयता की पूर्ण व्यवस्था की गई है। जस्टिस मेहता ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय प्रणाली में मानवीय संवेदनाओं का समावेश करना समय की मांग है और इस तरह की सुविधाएं कानूनी प्रक्रिया पर पीड़ितों के भरोसे को और अधिक मजबूत करती हैं। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र अग्रवाल ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि यह केंद्र न्यायिक कार्यवाही को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और संवेदनशील बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। इस पहल से गवाहों को आरोपी के सीधे संपर्क में आए बिना अपना पक्ष रखने की सुविधा मिलेगी, जिससे न्याय की गुणवत्ता में सुधार होगा।
