India में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की शुरुआत New Delhi में हो चुकी है। यह पांच दिवसीय समिट ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई सम्मेलन है। इस समिट का उद्देश्य वैश्विक एआई एजेंडा तय करने में भारत की भूमिका को और मजबूत करना है। यह आयोजन भारत को वैश्विक एआई सहयोग में एक प्रमुख भागीदार और समन्वयक के रूप में स्थापित करता है, जो साझा मानकों, सहयोगी ढांचे और जनहित में उपयोगी एआई समाधानों को बढ़ावा देगा।
समिट में दुनिया के 100 से अधिक देशों को आमंत्रित किया गया है और दो लाख से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। इस आयोजन में 20 देशों के शीर्ष नेता शामिल होने वाले हैं। इनमें Emmanuel Macron (France), Luiz Inácio Lula da Silva (Brazil), Pedro Sánchez (Spain), Guy Parmelin (Switzerland), Dick Schoof (Netherlands), Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan (United Arab Emirates), Navinchandra Ramgoolam (Mauritius), Anura Kumara Dissanayake (Sri Lanka), Sebastien Pillay (Seychelles) और Tshering Tobgay (Bhutan) शामिल हैं।
Ministry of External Affairs India के अनुसार, Bolivia, Croatia, Estonia, Finland, Greece, Guyana, Kazakhstan, Liechtenstein, Serbia और Slovakia के प्रतिनिधि भी इस समिट में भाग लेंगे। इसके अलावा 45 से अधिक देशों के मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होंगे।
इस समिट में United Nations के महासचिव और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होकर विचार-विमर्श करेंगे।
समिट तीन मुख्य सिद्धांतों या सूत्रों पर आधारित है—पीपल (लोग), प्लैनेट (पर्यावरण) और प्रोग्रेस (प्रगति)। ये सिद्धांत वैश्विक स्तर पर एआई सहयोग की दिशा तय करने के लिए बनाए गए हैं।
समिट की चर्चाएं सात प्रमुख क्षेत्रों या ‘चक्रों’ के जरिए आयोजित की जा रही हैं। इनमें मानव संसाधन विकास, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन, सुरक्षित और भरोसेमंद एआई, विज्ञान, लचीलापन, नवाचार और दक्षता, एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक विकास व सामाजिक कल्याण के लिए एआई जैसे विषय शामिल हैं।
यह समिट न केवल वैश्विक एआई नीति निर्माण में सहयोग बढ़ाएगा बल्कि विकासशील देशों को नई तकनीकों तक समान पहुंच दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
