भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें कुल निवेश 41,863 करोड़ रुपये (लगभग 4.6 अरब डॉलर) का अनुमान है। इन परियोजनाओं से 2.58 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और लगभग 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन की उम्मीद है।
यह मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा 2 जनवरी 2026 को दी गई। प्रमुख कंपनियां जैसे सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉक्सकॉन (युजान टेक्नोलॉजी इंडिया), डिक्सन टेक्नोलॉजीज, हिंदाल्को इंडस्ट्रीज, अमारा राजा-एटीएल, मोथरसन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और अन्य शामिल हैं।
इन परियोजनाओं में मोबाइल फोन एनक्लोजर, कैमरा सब-असेंबली, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), लिथियम-आयन सेल, कनेक्टर्स, डिस्प्ले मॉड्यूल, एल्यूमिनियम एक्सट्रूजन और अन्य कंपोनेंट्स का निर्माण शामिल है। फॉक्सकॉन की तमिलनाडु में परियोजना से 16,200 से अधिक नौकरियां सृजित होंगी, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की परियोजना से 1,500 रोजगार आएंगे।
यह स्कीम कुल 22,919 करोड़ रुपये की बजट वाली है, जिसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाना और भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत बनाना है। ये परियोजनाएं आठ राज्यों – तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश – में फैली हुई हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उद्योग को इनोवेशन और सिक्स सिग्मा क्वालिटी कंट्रोल पर फोकस करने की सलाह दी। यह कदम भारत को असेंबली से आगे कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जो चीन पर निर्भरता कम करेगा और निर्यात बढ़ाएगा।
