भारत ने औपचारिक रूप से ‘ब्रिक्स 2026’ की अध्यक्षता संभाल ली है। इस अवसर पर मंगलवार को ‘ब्रिक्स 2026’ की आधिकारिक वेबसाइट, थीम और लोगो का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह आयोजन भारत की आगामी अध्यक्षता के दृष्टिकोण, प्राथमिकताओं और वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है।
मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि जैसे यह पर्व आशा, नव ऊर्जा और सद्भावना का प्रतीक है, वैसे ही भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता भी वैश्विक कल्याण के लिए सदस्य देशों की सामूहिक क्षमताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि भारत ‘मानवता प्रथम’ और ‘जन-केंद्रित विकास’ के सिद्धांतों के साथ अपनी अध्यक्षता निभाएगा।
डॉ. जयशंकर ने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स संगठन अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे करेगा। दो दशकों में ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के बीच सहयोग का एक सशक्त मंच बनकर उभरा है। समय के साथ इस मंच ने न केवल अपने एजेंडे का विस्तार किया है, बल्कि सदस्यता को भी बढ़ाया है और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाला है।
उन्होंने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक अस्थिरता, जटिल आर्थिक हालात, जलवायु संकट, तकनीकी बदलाव और विकास में बढ़ती असमानता आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे समय में ब्रिक्स संवाद, सहयोग और व्यावहारिक समाधानों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है, जो विभिन्न देशों की प्राथमिकताओं और विकास स्तरों का सम्मान करता है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखा गया है। विदेश मंत्री ने कहा कि यह विषय इस विश्वास को दर्शाता है कि सदस्य देशों के बीच सहयोग साझा चुनौतियों का समावेशी और संतुलित समाधान निकाल सकता है। यह विषय नवाचार को बढ़ावा देने, क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण और सतत विकास को सुनिश्चित करने पर बल देता है।
ब्रिक्स 2026 के लोगो के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि यह परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय है। इसमें सभी सदस्य देशों के रंगों को समाहित किया गया है, जो विविधता में एकता और साझा उद्देश्य का प्रतीक है। यह लोगो इस विचार को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है कि ब्रिक्स अपनी सामूहिक शक्ति से आगे बढ़ता है, साथ ही प्रत्येक सदस्य की विशिष्ट पहचान का सम्मान करता है।
उन्होंने बताया कि ब्रिक्स इंडिया वेबसाइट भारत की अध्यक्षता के दौरान एक साझा डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगी। यह वेबसाइट बैठकों, पहलों, कार्यक्रमों और निर्णयों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सदस्य देशों तथा नागरिकों के बीच संवाद मजबूत होगा।
डॉ. जयशंकर ने भारत की चार प्रमुख प्राथमिकताओं—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता—को रेखांकित करते हुए कहा कि ब्रिक्स के तीन मूल स्तंभ—राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक एवं जन-स्तरीय संपर्क—एक संतुलित और सुसंगत ढांचा प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स, एमएसएमई और नई तकनीकों में बढ़ता सहयोग एक अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप न्यायसंगत सतत विकास के मार्गों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके साथ ही उन्होंने बहुपक्षवाद में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ब्रिक्स को समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने वाले सुधारित बहुपक्षवाद के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। भारत न्यू डेवलपमेंट बैंक को एक मजबूत, जवाबदेह और वित्तीय रूप से टिकाऊ संस्थान बनाने के प्रयासों का समर्थन करेगा।
विदेश मंत्री ने कहा कि लोगों के बीच आदान-प्रदान भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का एक अहम आधार रहेगा। युवाओं, संस्कृति, शिक्षा, खेल, पर्यटन और अकादमिक संवाद के माध्यम से सदस्य देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग को और सुदृढ़ किया जाएगा। भारत आपसी सम्मान, संप्रभु समानता और सहमति के सिद्धांतों पर आधारित, समावेशी और परिणामोन्मुख अध्यक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
