भारत और ब्राजील ने औषधि और चिकित्सा उत्पादों के नियमन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और ब्राजील की राष्ट्रीय स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी (एएनवीआईएसए) के बीच हुआ है, जो दोनों देशों के बीच गहन और संस्थागत नियामक सहयोग की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
एमओयू का आदान-प्रदान हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर एएनवीआईएसए के निदेशक अध्यक्ष लिएंड्रो सफाटले और ब्राजील में भारत के राजदूत दिनेश भाटिया मौजूद रहे। यह समझौता दोनों देशों के स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अनुसार, इस एमओयू के तहत दवा सामग्री, औषधियां, जैविक उत्पाद और चिकित्सा उपकरणों सहित औषधीय उत्पादों के क्षेत्र में सहयोग और सूचना के आदान-प्रदान के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य नियामक प्रक्रियाओं में सामंजस्य बढ़ाना, एक-दूसरे की नियामक प्रणालियों की समझ को गहरा करना और चिकित्सा उत्पादों की प्रभावी तथा समन्वित निगरानी सुनिश्चित करना है।
यह समझौता भारत और ब्राजील की इस साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है कि दोनों देशों की जनता को सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण दवाएं तथा चिकित्सा उत्पाद उपलब्ध कराए जाएं। इसके माध्यम से आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने, नियामक सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने की दिशा में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सीडीएससीओ और एएनवीआईएसए के बीच यह समझौता स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक भारत-ब्राजील साझेदारी को और मजबूती देगा। यह मौजूदा संस्थागत तंत्रों का पूरक साबित होगा और फार्मास्यूटिकल्स तथा चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को रेखांकित करेगा। विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के प्रमुख साझेदारों के रूप में दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं को यह समझौता नई दिशा प्रदान करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस एमओयू के बाद भारत-ब्राजील संबंधों को और बल मिलेगा तथा स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर खुलेंगे। इससे दोनों देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार और बेहतर चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
