इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत के निर्यात क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स अब तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है, जबकि पहले यह सातवें स्थान पर था। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में मंत्री ने बताया कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माण देश बन चुका है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भारत की तेज़ प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यापक और मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने के दृष्टिकोण का परिणाम है।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए शुरू की गई पीएलआई योजना (LSEM) के तहत अब तक 13,475 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है और 9.8 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया गया है। इस योजना से पिछले पांच वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में विनिर्माण, रोजगार और निर्यात को उल्लेखनीय बढ़ावा मिला है, जिससे 1.3 लाख से अधिक नौकरियों का सृजन हुआ है।
मंत्री ने कहा कि सरकार अब मॉड्यूल, कंपोनेंट, सब-मॉड्यूल, कच्चे माल और विनिर्माण मशीनरी के लिए क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दे रही है। इस दिशा में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत 249 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो 1.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश, 10.34 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन और 1.42 लाख नौकरियों के सृजन का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धता मानी जा रही है, जो उद्योग के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
अश्विनी वैष्णव ने यह भी जानकारी दी कि देश में अब तक 10 सेमीकंडक्टर यूनिट्स को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से तीन यूनिट्स पायलट या प्रारंभिक उत्पादन चरण में पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से 25 लाख नौकरियों का सृजन हुआ है, जो जमीनी स्तर पर वास्तविक आर्थिक विकास का संकेत है।
मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार होगा, रोजगार के अवसर और तेजी से बढ़ेंगे। मेक इन इंडिया पहल के प्रभाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि तैयार उत्पादों और कंपोनेंट्स दोनों के उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है, निर्यात बढ़ रहा है, वैश्विक कंपनियों का भरोसा मजबूत हुआ है, भारतीय कंपनियां अधिक प्रतिस्पर्धी बन रही हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
