प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जॉर्डन यात्रा ने भारत और जॉर्डन के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा और ठोस मजबूती दी है। इस उच्चस्तरीय दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन, संस्कृति, विरासत संरक्षण और डिजिटल सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने वाली कई अहम सहमतियां तय हुईं। इन समझौतों को भविष्य-केंद्रित और दीर्घकालिक सहयोग का आधार माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा संदेश में कहा कि यह यात्रा भारत–जॉर्डन साझेदारी के एक महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग स्वच्छ विकास, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु के प्रति साझा जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। यह पहल दोनों देशों के लिए हरित भविष्य की ओर कदम बढ़ाने में सहायक होगी।
पीएम मोदी ने जल संसाधन प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में सहयोग से संरक्षण, दक्षता और आधुनिक तकनीकों के बेहतरीन तरीकों को साझा करने का अवसर मिलेगा। इससे दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जो दोनों देशों के लिए एक बड़ी प्राथमिकता है।
इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण पेट्रा (जॉर्डन) और एलोरा (भारत) के बीच हुआ ट्विनिंग एग्रीमेंट रहा। प्रधानमंत्री ने इसे विरासत संरक्षण, पर्यटन विकास और अकादमिक आदान-प्रदान के नए अवसर खोलने वाला करार दिया। इसके साथ ही 2025–2029 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के नवीकरण से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और सांस्कृतिक जुड़ाव को और गहराई मिलेगी।
डिजिटल सहयोग को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपने सफल डिजिटल नवाचारों और जनसंख्या-स्तर पर लागू समाधानों को जॉर्डन के साथ साझा करेगा। इससे जॉर्डन के डिजिटल परिवर्तन को समर्थन मिलेगा और समावेशी शासन को बढ़ावा मिलेगा।
इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी थी कि प्रधानमंत्री की जॉर्डन यात्रा के दौरान कुल पांच प्रमुख समझौते और सहमतियां अंतिम रूप दी गईं। इनमें नई और नवीकरणीय ऊर्जा में तकनीकी सहयोग, जल संसाधन प्रबंधन, पेट्रा–एलोरा ट्विनिंग एग्रीमेंट, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का नवीकरण और डिजिटल सहयोग पर आशय पत्र शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से भारत और जॉर्डन के संबंध रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर पहुंचेंगे और क्षेत्रीय व वैश्विक मंच पर दोनों देशों की भूमिका और मजबूत होगी।
