नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत और अमेरिका ने ‘पैक्स सिलिका’ घोषणा पर हस्ताक्षर किए। इस महत्वपूर्ण समझौते का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर उत्पादन के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है, ताकि एक सुरक्षित और सशक्त वैश्विक सिलिकॉन एवं तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा सके।
हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने की। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में नेतृत्वकारी भूमिका निभाना है। उन्होंने बताया कि भारतीय इंजीनियर दो नैनोमीटर जैसे अत्याधुनिक और जटिल चिप्स डिजाइन कर रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग को 10 लाख से अधिक प्रतिभाशाली पेशेवरों की आवश्यकता होगी और यह जरूरत देश के भीतर ही पूरी की जाएगी।
उन्होंने जानकारी दी कि देशभर के 315 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र चिप डिजाइनिंग में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, जो भारत की तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा कि व्यापार समझौते से लेकर पैक्स सिलिका और रक्षा सहयोग तक, भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की संभावनाएं असीमित हैं। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने के लिए बनाया जा रहा है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों, चिप निर्माण और एआई तैनाती तक पूरी सिलिकॉन श्रृंखला को सुरक्षित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ‘पैक्स सिलिका’ का उद्देश्य दबाव आधारित निर्भरताओं को समाप्त कर विश्वसनीय औद्योगिक साझेदारियों को बढ़ावा देना है, जो मुक्त बाजार व्यवस्था को सशक्त बनाएंगी। साथ ही उन्होंने भरोसेमंद एआई के वैश्विक विकास पर जोर देते हुए कहा कि शांति शक्ति से आती है।
