भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा का असर भारतीय शेयर बाजार पर तुरंत देखने को मिला। मंगलवार सुबह भारतीय इक्विटी बाजार में लगभग 3 प्रतिशत से अधिक की तेज़ बढ़त दर्ज की गई और लगभग सभी सेक्टर में बड़े स्तर पर खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों के सकारात्मक रुख और वैश्विक स्तर पर बेहतर संकेतों के चलते बाजार में मजबूत तेजी आई।
बाजार खुलने के साथ ही सेंसेक्स 3,657 अंक यानी करीब 4.48 प्रतिशत की बढ़त के साथ 85,323 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 1,220 अंक यानी 4.86 प्रतिशत बढ़कर 26,308 के स्तर पर खुला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है और इससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना है।
भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में लगने वाला पारस्परिक टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के बाद इस टैरिफ राहत को तुरंत लागू करने की बात कही है। इस फैसले को भारत के लिए बड़ा व्यापारिक फायदा माना जा रहा है।
ब्रॉड मार्केट इंडेक्स में भी मजबूत तेजी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में लगभग 3.10 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब 3.25 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार में केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मिड और स्मॉल कैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो लगभग सभी सेक्टर में तेजी देखने को मिली। सबसे ज्यादा बढ़त रियल एस्टेट, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी सेक्टर में रही। रियल्टी सेक्टर में करीब 4.47 प्रतिशत, ऑटो सेक्टर में 3.78 प्रतिशत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 3.69 प्रतिशत और आईटी सेक्टर में 3.04 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
टैरिफ को 18 प्रतिशत किए जाने के बाद भारत अब कई प्रमुख एक्सपोर्ट आधारित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर स्थिति में आ गया है। बांग्लादेश, श्रीलंका, ताइवान और वियतनाम पर करीब 20 प्रतिशत टैरिफ है, जबकि इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस और पाकिस्तान पर करीब 19 प्रतिशत टैरिफ लागू है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी के लिए फिलहाल 25,600 से 25,800 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है, जबकि 26,200 से 26,350 का स्तर रेजिस्टेंस जोन हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से जिस भारत-अमेरिका ट्रेड डील का इंतजार किया जा रहा था, उसकी अचानक घोषणा बाजार के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार इस समझौते से अमेरिका को भारतीय निर्यात बढ़ने की संभावना है, जिससे वित्त वर्ष 2027 तक भारत की आर्थिक विकास दर करीब 7.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं कॉर्पोरेट अर्निंग्स में भी सुधार होने की उम्मीद है और यह 16 से 18 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
बाजार जानकारों का मानना है कि इस समझौते के बाद भारतीय रुपये में मजबूती आ सकती है। साथ ही अगर भारत-अमेरिका ट्रेड डील, संभावित यूरोप-भारत ट्रेड डील और विकास केंद्रित बजट का असर एक साथ पड़ा तो बाजार का सेंटीमेंट और मजबूत हो सकता है। इससे विदेशी निवेशकों का निवेश भी तेजी से बढ़ सकता है और भारत की बैलेंस ऑफ पेमेंट स्थिति मजबूत हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार बैंकिंग, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां, टेलीकॉम, कैपिटल गुड्स और आईटी सेक्टर के बड़े शेयरों में विदेशी निवेशकों का निवेश बढ़ सकता है। ये सेक्टर विदेशी संस्थागत निवेशकों की पहली पसंद माने जाते हैं।
एशियाई बाजारों में भी तेजी का माहौल रहा। चीन का शंघाई इंडेक्स 0.38 प्रतिशत और शेनझेन इंडेक्स 0.93 प्रतिशत बढ़ा। जापान का निक्केई इंडेक्स 3.23 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 0.11 प्रतिशत बढ़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5.04 प्रतिशत की बड़ी बढ़त के साथ बंद हुआ।
अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। नैस्डैक 0.56 प्रतिशत, एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.54 प्रतिशत और डाउ जोंस 1.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 2 फरवरी को भारतीय बाजार से 1,832 करोड़ रुपये की इक्विटी की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 2,446 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदकर बाजार को समर्थन दिया।
