विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक असर को लेकर कूटनीतिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण बातचीत कीं। उन्होंने कल Marco Rubio अमेरिकी विदेश मंत्री से टेलीफोन पर चर्चा की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, उसके अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों देशों ने मौजूदा हालात को गंभीरता से लेते हुए वैश्विक स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
विदेश मंत्री ने उसी दिन खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों के राजदूतों के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, ओमान, कुवैत और कतर के राजनयिक शामिल हुए। बैठक के दौरान पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय स्थिरता और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चर्चा की गई। विदेश मंत्री ने इन देशों द्वारा भारतीय समुदाय को लगातार दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
सरकार के अनुसार केवल सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में ही लगभग 80 लाख भारतीय रह रहे हैं, इसलिए भारत इन देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है ताकि वहां रह रहे भारतीयों के हित सुरक्षित रहें। डॉ. जयशंकर ने कहा कि खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानवीय और रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
इससे पहले विदेश मंत्री ने Vijitha Herath श्रीलंका के विदेश मंत्री से भी बातचीत की। इस चर्चा में पश्चिम एशिया संकट के दक्षिण एशिया पर पड़ने वाले असर, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया गया। डॉ. जयशंकर ने दोहराया कि भारत अपनी पड़ोस प्रथम नीति और दृष्टि महासागर के तहत पड़ोसी देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर तेल कीमतों, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। ऐसे समय में भारत की सक्रिय कूटनीति यह संकेत देती है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है और अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार संवाद कर रही है।
